Anti-Naxal Campaign:
Anti-Naxal Campaign: महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ स्पेशल जोनल कमेटी (MMC ज़ोन) के प्रवक्ता अनंत ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर एक बड़ी पहल की है। इस पत्र में उन्होंने सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे मौजूदा अभियानों को तत्काल रोकने की अपील की है और साथ ही, इस बार ‘नक्सली सप्ताह’ न मनाने की घोषणा भी की है। सबसे अहम बात यह है कि MMC ज़ोन ने हथियार त्याग कर सरकार की पुनर्वास (Rehabilitation) योजना को स्वीकार करने के लिए समय माँगा है, जो नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में एक बड़ा और संभावित सकारात्मक कदम हो सकता है।
प्रवक्ता अनंत ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि उनकी कमेटी, पार्टी की केंद्रीय कमेटी के सदस्य और पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड सोनू दादा के निर्णय का पूर्ण समर्थन करती है। सोनू दादा ने वर्तमान परिस्थितियों का आकलन करते हुए हथियार त्यागकर सशस्त्र संघर्ष को अस्थायी रूप से विराम देने का फैसला किया है। यह दर्शाता है कि केंद्रीय नेतृत्व में भी आत्मसमर्पण और मुख्यधारा में लौटने की इच्छा बलवती हो रही है। MMC ज़ोन के लिए यह निर्णय एक बड़ा वैचारिक और रणनीतिक बदलाव है। कमेटी में पहले कॉमरेड सतीश दादा, और हाल ही में कॉमरेड चंद्रत्ना ने भी इस निर्णय का समर्थन किया है। यह आंतरिक समर्थन इस कदम की गंभीरता को बढ़ाता है।
MMC स्पेशल जोनल कमेटी ने अब खुलकर हथियार छोड़कर सरकार की पुनर्वास और पुनर्निर्माण योजना को स्वीकार करने की इच्छा व्यक्त की है। इसके लिए, उन्होंने तीनों राज्यों की सरकारों से विनम्र अनुरोध किया है कि उन्हें योजना स्वीकार करने और समर्पण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुछ समय दिया जाए।प्रवक्ता अनंत ने विशेष रूप से तीनों राज्य सरकारों से 15 फरवरी 2026 तक का समय देने का निवेदन किया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह समय-सीमा सरकार द्वारा माओवाद समाप्ति के लिए पहले से तय की गई अंतिम तिथि (31 मार्च 2026) के दायरे में ही आती है।
इस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान, यानी 15 फरवरी 2026 तक, प्रवक्ता अनंत ने तीनों राज्य सरकारों से संयम बरतने और अपने सुरक्षा बलों के अभियानों को तत्काल रोकने का अनुरोध किया है। यहाँ तक कि उन्होंने आगामी पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) सप्ताह के दौरान भी किसी तरह का कोई सैन्य अभियान न चलाने की बात कही है। इसके अलावा, उन्होंने मुखबिरों की गतिविधियों को भी रोकने और इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर सुरक्षा बलों को किसी भी कार्रवाई में शामिल न करने का आग्रह किया है।
बदले में, नक्सली प्रवक्ता ने यह विश्वास दिलाया है कि वे इस बार पीएलजीए सप्ताह नहीं मनाएँगे और उनकी तमाम गतिविधियाँ इस दौरान विराम पर रहेंगी। नक्सली प्रवक्ता द्वारा इस तरह का आधिकारिक पत्र जारी किया जाना एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कड़ी नीतियों की सफलता और 31 मार्च 2026 की समय-सीमा के दबाव का संकेत हो सकता है। यह उम्मीद जगी है कि भविष्य में शांति बहाली की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। हालाँकि, यह एक संवेदनशील स्थिति है, और सरकारों तथा सुरक्षा बलों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी, ताकि इस शांति पहल की आड़ में किसी भी अप्रत्याशित या नकारात्मक घटना से बचा जा सके।
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