Anti Naxal Operation 2025: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा ‘नक्सल मुक्त भारत’ अभियान को लेकर दिए गए स्पष्ट संदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी नक्सलियों को खुली चेतावनी दी है। विजय शर्मा ने कहा, “सरकार लाल कालीन बिछाकर नक्सलियों के आत्मसमर्पण का स्वागत करने को तैयार है, लेकिन हथियार उठाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”

नक्सलवाद पर सरकार की स्पष्ट नीति: बातचीत नहीं, आत्मसमर्पण करें
गृहमंत्री विजय शर्मा ने अमित शाह के हालिया बयान का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार की नीति बिल्कुल स्पष्ट है — न कोई सीजफायर होगा, न कोई बातचीत। नक्सलियों को यदि मुख्यधारा में लौटना है, तो उन्हें निर्विवाद रूप से हथियार डालने होंगे। उन्होंने कहा, “नक्सलियों ने जो पत्र लिखा है, उसमें यह भावना ज़रूर है कि बस्तर में खून-खराबा बंद होना चाहिए। अगर यह भावना सच्ची है, तो उन्हें बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण करना चाहिए।”

हथियार डालें, एक भी गोली नहीं चलेगी – अमित शाह
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘भारत मंथन-2025: नक्सल मुक्त भारत’ कार्यक्रम में कहा था कि”हम किसी को नहीं मारना चाहते, लेकिन निर्दोषों की हत्या करने वालों को बख्शा भी नहीं जा सकता।”उन्होंने कहा कि यदि नक्सली आत्मसमर्पण करते हैं तो पुलिस गोली नहीं चलाएगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ की भी सराहना की और कहा कि यह अभियान नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
संघर्ष विराम के प्रस्ताव को सरकार ने ठुकराया
अमित शाह ने नक्सलियों के संघर्ष विराम (सीजफायर) प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा,”जो लोग कहते हैं कि नक्सलवाद का कारण विकास की कमी है, वे सच्चाई को छिपा रहे हैं। सच्चाई यह है कि नक्सलवाद खुद विकास का सबसे बड़ा बाधक है।”उन्होंने बताया कि पीएम मोदी की कई योजनाएं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई जा रही हैं, लेकिन स्कूल, सड़क और अस्पताल नहीं बन पाने का कारण खुद नक्सली हैं, जो ठेकेदारों को मार देते हैं और विकास कार्यों में बाधा डालते हैं।
अब तक 1700+ नक्सली मुख्यधारा में लौटे
छत्तीसगढ़ सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1700 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि 1600 से अधिक गिरफ्तार किए जा चुके हैं। कई मुठभेड़ों में मारे भी गए हैं। इससे यह स्पष्ट है कि नक्सलवाद अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है, और सरकार इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
अमित शाह और विजय शर्मा के बयानों से यह स्पष्ट है कि सरकार अब नक्सलियों के लिए कोई नरमी नहीं बरतने वाली। “हथियार डालो, हम स्वागत करेंगे; हथियार उठाओ, तो जवाब मिलेगा” यही सरकार की नीति है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास के लिए यह सख्ती जरूरी मानी जा रही है।










