Anticipatory Bail Rejected : अंबिकापुर शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड के पास रिंग बांध क्षेत्र में नगर निगम की कार्रवाई में बाधा डालना आरोपी को महंगा पड़ गया। निगम कर्मचारियों से गाली-गलौज और मारपीट की धमकी देने के मामले में आरोपी आजाद इराकी को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
जानकारी अनुसार रिंग बांध के जलभराव क्षेत्र को पाट दिया गया था। इस संबंध में नगर निगम ने जयनगर निवासी आजाद इराकी (39) को नोटिस जारी कर निर्धारित समयावधि में मिट्टी हटाने के निर्देश दिए थे। निर्देशों का पालन नहीं होने पर निगम की टीम मशीनों के साथ मौके पर पहुंचकर मिट्टी हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। इसी दौरान आरोपित अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचा और कर्मचारियों के साथ अभद्रता करते हुए गाली-गलौज की।
आरोप है कि उसने अधिकारियों को बुलाने की धमकी देते हुए कर्मचारियों को डराया-धमकाया और ट्रैक्टर व एक्सीवेटर को जबरन हटवा दिया, जिससे निगम की टीम को मौके से लौटना पड़ा। हालांकि बाद में यह कार्य फिर से किया गया था। घटना के बाद नगर निगम के कर्मचारी की शिकायत पर पुलिस ने आजाद इराकी एवं उसके सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। हालांकि, अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
इस बीच, आरोपी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। अग्रिम जमानत आवेदन पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा, प्रकरण के अवलोकन से यह दर्शित होता है कि जल भराव के स्थान एवं नाला को आरोपी के द्वारा पाट दिया गया है, जिसे हटाने के लिए प्रशासन के द्वारा आरोपी को निर्देशित किया गया, परंतु उसके द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया और न ही हटाया गया, तब प्रशासन के द्वारा पाटे गए नाला एवं बस स्टैण्ड के पास बांध के पाटे हुए मिट्टी को हटाने के लिए ट्रेक्टर एवं एक्सीवेटर लगाया गया था।
तब आरोपीगण अपने अन्य साथियों के साथ उपस्थित होकर गालियां देते हुए, कौन अधिकारी बोला है, उसे बुलाओ कहकर, ट्रेक्टर एवं एक्सीवेटर को बिना प्रशासन के अनुमति के हटा दिया, जिससे स्पष्ट है कि आरोपियों का हौसला बुलंद है तथा आरोपी के अन्य साथी भी फरार हैं, अगर आवेदक को अग्रिम जमानत का लाभ दिया गया तो निश्चित ही अन्य घटना को भी अंजाम दे सकते हैं एवं प्रशासन को चुनौती दे सकते हैं, जिससे अराजकता फैलने की संभावना है, इसलिए अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना मैं उचित नहीं समझता हूं। अतः आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं हो रहा है। फलतः आरोपित का अग्रिम जमानत आवेदन निरस्त किया गया।
इधर इस प्रकरण से जुड़े जमीन के दस्तावेजों पर भी सवाल उठे हैं। रजिस्ट्री में गड़बड़ी और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के उपयोग की आशंका जताई गई है। इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा, भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने पूरे प्रकरण की शिकायत अधिकारियों से कर जांच व कार्रवाई की मांग की है।
West Bengal Bulldozer Action : पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को एक ऐतिहासिक दृश्य…
SIR Phase 3 India : भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक…
Karonda Farming : आजकल खेती के पारंपरिक तरीकों में लागत बढ़ने और अनिश्चित मुनाफे के…
AFCAT 2 Notification 2026 : देश सेवा का जज्बा रखने वाले और आसमान की ऊंचाइयों…
Wholesale Inflation India : मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अस्थिरता का असर अब…
Girl touching her own feet : आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया एक ऐसा…
This website uses cookies.