AR Rahman Controversy: ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान, जो अपनी बेहतरीन धुनों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं, इन दिनों एक विवाद के केंद्र में हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री (बॉलीवुड) के मौजूदा हालातों और संगीत निर्माण की प्रक्रिया पर तीखी टिप्पणी की है। रहमान के इस बयान ने फिल्म जगत में एक नई बहस छेड़ दी है, जिसमें संगीतकारों की घटती रचनात्मक स्वतंत्रता और फिल्म निर्माण के बदलते समीकरणों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
क्रिएटिव हाथों से छिन गई फैसले लेने की ताकत
बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए एक विशेष साक्षात्कार में एआर रहमान ने खुलासा किया कि उन्होंने पिछले 8 वर्षों में बॉलीवुड संगीत की गुणवत्ता और कार्यशैली में भारी गिरावट महसूस की है। रहमान का मानना है कि निर्णय लेने की शक्ति अब उन लोगों के हाथों में चली गई है जो रचनात्मक (Creative) नहीं हैं। उन्होंने कहा, “पॉवर अब उन लोगों के पास शिफ्ट हो गई है जो आर्ट की समझ नहीं रखते, जिससे मिलने वाले अवसरों और काम की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है।”
बॉलीवुड में ‘मल्टी-कंपोजर’ संस्कृति पर निशाना
रहमान ने फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते ‘मल्टी-कंपोजर’ चलन की आलोचना की, जहाँ एक ही फिल्म के गानों के लिए कई अलग-अलग संगीतकारों को नियुक्त किया जाता है। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि अक्सर किसी मुख्य संगीतकार को बुक करने के बाद म्यूजिक कंपनियां अपनी पसंद के पांच अन्य कंपोजर्स को शामिल कर लेती हैं। रहमान ने स्पष्ट किया कि उन्हें काम की तलाश में भटकने की जरूरत नहीं है और वे चाहते हैं कि काम उनकी ईमानदारी और योग्यता के आधार पर उनके पास आए।
सांप्रदायिक एंगल और कानाफूसी पर बयान
इस बातचीत के दौरान रहमान ने एक और संवेदनशील मुद्दे की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि उनके सामने कभी कारण स्पष्ट नहीं किए गए, लेकिन कानाफूसी के तौर पर यह बात उन तक पहुँचती है कि इसके पीछे ‘सांप्रदायिक कारण’ भी हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि यह उनके सामने प्रत्यक्ष रूप से नहीं है, केवल चर्चाओं के माध्यम से उन तक पहुँचता है। उनके इस कमेंट को काफी ‘खतरनाक’ और विवादित माना जा रहा है।
फिल्म ‘छावा’ और छत्रपति शिवाजी महाराज का गौरव
आगामी फिल्म ‘छावा’ के बारे में बात करते हुए रहमान भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने इस फिल्म का हिस्सा बनने पर सवाल उठाया था, लेकिन निर्देशक के भरोसे ने उन्हें प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज हर मराठा के खून में हैं। इस फिल्म का संगीत देना मेरे लिए सम्मान की बात है क्योंकि यह मराठा भावना और आत्मा को प्रदर्शित करती है।” उन्होंने दर्शकों की समझदारी की सराहना करते हुए कहा कि लोग सच और हेरफेर (Manipulation) के बीच का अंतर अच्छी तरह जानते हैं।
शोभा डे ने की एआर रहमान की खिंचाई
मशहूर लेखिका और उपन्यासकार शोभा डे ने एआर रहमान के इन बयानों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने रहमान के कमेंट को ‘खतरनाक’ बताते हुए कहा कि वे पिछले पांच दशकों से बॉलीवुड को बहुत करीब से देख रही हैं। शोभा डे का तर्क है कि फिल्म इंडस्ट्री केवल टैलेंट पर चलती है। उन्होंने कहा, “अगर आपके पास टैलेंट है, तो आपको काम मिलेगा। अगर टैलेंट नहीं है, तो मौका नहीं मिलेगा। यही कड़वी हकीकत है और यह किसी सांप्रदायिकता या बाहरी शक्ति पर निर्भर नहीं है।”
















