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Nepal Political Crisis: नेपाल में अब खेल पलट सकती है सेना, राजा ज्ञानेंद्र के साथ समझौता का संकेत

Nepal Political Crisis: नेपाल में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री के इस्तीफा देने के बाद भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरकर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। हालांकि, राष्ट्रपति और नेपाली सेना ने शांति बनाए रखने की बार-बार अपील की है। सुरक्षा के मद्देनजर बड़ी संख्या में सेना को सड़कों पर तैनात किया गया है, जिससे हालात में कुछ हद तक सुधार नजर आया है। लेकिन अभी भी देश में स्थिरता कायम नहीं हो पाई है।

सेना का कड़ा नियंत्रण और शीर्ष नेताओं की नजरबंदी

रिपोर्टों के मुताबिक, काठमांडू समेत पूरे नेपाल में नेपाली सेना ने अपनी गश्त कड़ी कर दी है। प्रमुख राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं को दोपहर से संपर्कहीन रखा गया है। नेपाल प्रहरी के आईजीपी ने विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश जारी किया है। देश की सुरक्षा के मद्देनजर ये कदम उठाए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

राजा ज्ञानेंद्र का सक्रिय कदम

नेपाल के नरेश राजा ज्ञानेंद्र ने भी इस संकट के बीच बड़ी सक्रियता दिखाई है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर शांति बनाए रखने की अपील की है। राजा ने Gen-Z नेताओं से भी मुलाकात की है और राष्ट्र के नाम एक संदेश दिया है। इस संदेश ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है।

सेना और राजा के बीच समझौते की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, नेपाल की सेना और राजा ज्ञानेंद्र के बीच कुछ बड़ा समझौता हो सकता है, जो देश के राजनीतिक खेल को पूरी तरह पलट सकता है। कहा जा रहा है कि आज की रात नेपाल के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। व्यापक चर्चा है कि यदि वर्तमान संविधान समाप्त घोषित कर दिया जाता है तो संवैधानिक राजतंत्र पुनः लागू हो सकता है।

इस स्थिति में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र नेपाली सेना के सर्वोच्च प्रमुख बन जाएंगे, जो संविधान के अनुसार राष्ट्रपति का स्थान लेते हैं। उनके आदेशों के तहत एक अंतरिम सरकार गठित की जा सकती है, जो देश में स्थिरता लाने का प्रयास करेगी।

राजनीतिक संकट में नया मोड़

नेपाल में पिछले दिनों हुए हिंसक प्रदर्शन और राजनीतिक गड़बड़ी के कारण प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दिया था। लेकिन उसके बाद भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। दोनों पक्षों के बीच घमासान ने देश को अस्थिर बना दिया है। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नया अंतरिम प्रधानमंत्री कौन बनेगा। ऐसे में सेना की भूमिका निर्णायक हो सकती है।

नेपाल की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में सेना और राजा के बीच समझौता देश की दिशा बदल सकता है। संवैधानिक राजतंत्र की वापसी और सेना के सक्रिय नेतृत्व से देश में स्थिरता लौटाने की कोशिश की जाएगी। आने वाली रात नेपाल के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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