Asansol Tension
Asansol Tension: पश्चिम बंगाल के औद्योगिक शहर आसनसोल में मंगलवार की दोपहर एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे क्षेत्र के भाषाई और साम्प्रदायिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है। कालीपहाड़ी क्षेत्र के निवासियों के लिए दिन की शुरुआत सामान्य थी, लेकिन दोपहर होते-होते शांति हिंसा और आक्रोश में बदल गई। शहर के वार्ड नंबर 38 में स्थित लगभग 200 वर्ष पुराने एक ऐतिहासिक मंदिर को असामाजिक तत्वों ने अपना निशाना बनाया। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, बल्कि पूरे आसनसोल उपमंडल में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। उपद्रवियों द्वारा आस्था के इस प्राचीन केंद्र पर किए गए हमले ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और मंदिर समिति के सदस्यों के अनुसार, मंगलवार की सुबह मंदिर में नित्य की भांति पूजा-पाठ संपन्न हुआ था। दोपहर के समय जब श्रद्धालु और सेवादार दोबारा मंदिर परिसर पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित मां काली, भगवान शिव और संकटमोचन हनुमान जी की अत्यंत प्राचीन और श्रद्धेय मूर्तियां खंडित अवस्था में जमीन पर बिखरी पड़ी थीं। इतना ही नहीं, बर्बरता की हद पार करते हुए हमलावरों ने भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु की प्रतिमाओं को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था। जैसे ही मूर्तियों के खंडित होने की खबर मोहल्ले में फैली, देखते ही देखते सैकड़ों लोगों का हुजूम मंदिर के बाहर जमा हो गया और हवा में तनाव तैरने लगा।
चूंकि पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, इसलिए इस घटना को महज सामान्य तोड़फोड़ के रूप में नहीं देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे ध्रुवीकरण की एक सोची-समझी कोशिश माना जा रहा है। स्थानीय पार्षद मीना कुमारी हांसदा ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया और इस कृत्य की कड़े शब्दों में भर्त्सना की। उन्होंने अंदेशा जताया कि चुनाव के इस नाजुक दौर में शहर की फिजा खराब करने के लिए यह एक ‘सुनियोजित साजिश’ हो सकती है। वहीं, आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पॉल ने मौके पर पहुंचकर प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने हैरानी जताई कि इतने महत्वपूर्ण और पुराने मंदिर परिसर में एक भी सीसीटीवी (CCTV) कैमरा मौजूद नहीं था, जिससे अपराधियों की पहचान करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
घटना के विरोध में स्थानीय निवासियों और भाजपा समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। विधायक अग्निमित्रा पॉल के नेतृत्व में भैरव बाबा स्थान से एक विशाल विरोध मार्च निकाला गया, जिसमें ‘दोषियों को फांसी दो’ के नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने आसनसोल की जीवनरेखा मानी जाने वाली जीटी रोड (GT Road) को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। प्रदर्शन के दौरान बीच सड़क पर टायर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया गया, जिससे घंटों तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और पूरे व्यापारिक क्षेत्र में डर के कारण दुकानें बंद कर दी गईं। जनता की मांग है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी होनी चाहिए।
मामले की संवेदनशीलता और बिगड़ते हालातों को देखते हुए जिला प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। किसी भी संभावित दंगे या अप्रिय घटना को रोकने के लिए राज्य पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों (Central Forces) की कई टुकड़ियों को संवेदनशील मोर्चों पर तैनात किया गया है। पुलिस के आला अधिकारी लगातार गश्त कर रहे हैं और शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। फिलहाल, पुलिस संदिग्धों की पहचान के लिए आसपास के इलाकों के निजी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है, लेकिन स्थानीय समाज में व्याप्त असुरक्षा की भावना को कम करना फिलहाल एक बड़ी चुनौती नजर आ रहा है।
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