Assam Earthquake: पिछले कुछ समय से न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भूकंप की आवृत्ति में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। तुर्की, सीरिया और नेपाल जैसे देशों में आए विनाशकारी भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई। इन घटनाओं ने पूरी दुनिया में एक अनजाना डर पैदा कर दिया है। इसी कड़ी में, सोमवार की सुबह भारत के लिए भी चिंताजनक रही, जब पूर्वोत्तर के दो प्रमुख राज्यों—असम और त्रिपुरा—में धरती कांप उठी। लोग गहरी नींद में थे जब अचानक आए इन झटकों ने उन्हें घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया।
Assam Earthquake: त्रिपुरा के गोमती जिले में महसूस किए गए झटके
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार तड़के सबसे पहला झटका त्रिपुरा राज्य में महसूस किया गया। राज्य के गोमती क्षेत्र में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.9 दर्ज की गई। यह भूकंप सुबह 3:33 बजे आया, जब चारों ओर शांति थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर 54 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। हालांकि तीव्रता कम होने के कारण जान-माल के बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन सुबह-सुबह आए इस झटके ने स्थानीय निवासियों को सतर्क कर दिया है।
Assam Earthquake : असम के मोरीगांव में आया जोरदार भूकंप
त्रिपुरा में आए झटके के कुछ ही समय बाद, पड़ोसी राज्य असम में भी धरती हिलने की खबर आई। असम में आए भूकंप की तीव्रता त्रिपुरा की तुलना में काफी अधिक थी। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने बताया कि रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.1 मापी गई, जिसे वैज्ञानिक दृष्टि से ‘मध्यम से तेज’ श्रेणी में रखा जाता है। यह झटका सुबह 4:17 बजे असम के मोरीगांव इलाके में महसूस किया गया। इस भूकंप का केंद्र सतह से 50 किलोमीटर नीचे था। तेज झटकों के कारण कई घरों की खिड़कियां और सामान हिलने लगा, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
भूकंप आने के पीछे का वैज्ञानिक कारण
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर धरती बार-बार क्यों हिलती है? भू-विज्ञान के अनुसार, हमारी पृथ्वी की ऊपरी सतह मुख्य रूप से 7 बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है। ये प्लेटें स्थिर नहीं हैं और पृथ्वी के भीतर मौजूद तरल पदार्थ के ऊपर तैरती रहती हैं। अपने रोटेशन के दौरान, ये प्लेटें कभी-कभी आपस में टकरा जाती हैं या एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने की कोशिश करती हैं। जहां ये प्लेटें मिलती हैं, उन्हें ‘फॉल्ट लाइन’ कहा जाता है।
ऊर्जा का उत्सर्जन और धरती का कंपन
जब ये विशालकाय प्लेटें आपस में टकराती हैं, तो उनके किनारों पर भारी घर्षण (Friction) पैदा होता है। इस प्रक्रिया के दौरान भारी मात्रा में दबाव और ऊर्जा एकत्र हो जाती है। जब यह ऊर्जा अपनी सहनसीमा से बाहर हो जाती है, तो यह बाहर निकलने का रास्ता खोजती है। इसी ऊर्जा के अचानक निकलने से पैदा होने वाली तरंगें जब धरती की सतह तक पहुंचती हैं, तो हमें भूकंप के झटके महसूस होते हैं। हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत ऐसी ही सक्रिय प्लेटों के ऊपर स्थित है, जिससे यहां भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है।
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