Attachment Over : छत्तीसगढ़ शासन के सख्त निर्देशों के बाद सरगुजा संभाग के स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से चल रही संलग्नीकरण व्यवस्था पर पूर्ण विराम लग गया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की विधानसभा में की गई घोषणा के अनुपालन में संभाग के सभी जिलों में संलग्न कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस फैसले से जहां प्रशासनिक पारदर्शिता और अनुशासन को बल मिलने की बात कही जा रही है, वहीं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।

432 कर्मचारियों पर सीधा असर
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार सरगुजा संभाग के कुल 432 शासकीय सेवकों का संलग्नीकरण समाप्त किया गया है। इनमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर डॉक्टर स्तर तक के कर्मचारी शामिल हैं। ये सभी अब अपने मूल पदस्थापना स्थल पर ही सेवाएं देंगे।

क्या है संलग्नीकरण और क्यों बना मुद्दा
संलग्नीकरण एक प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसके तहत कर्मचारियों को अस्थायी रूप से अन्य स्थानों पर कार्य करने की अनुमति दी जाती है। सरगुजा जैसे आदिवासी और भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में यह व्यवस्था लंबे समय से लागू थी, ताकि जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
हालांकि, समय के साथ इस व्यवस्था के दुरुपयोग के आरोप भी सामने आए। कुछ प्रभावशाली कर्मचारियों द्वारा मनचाहे स्थानों पर संलग्नीकरण कराने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिससे मूल पदस्थापना स्थल पर कर्मचारियों की कमी बनी हुई थी।
शासन का सख्त रुख, एक आदेश में खत्म हुई व्यवस्था
स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा के बाद स्वास्थ्य संचालनालय ने संयुक्त संचालकों, सीएमएचओ और सिविल सर्जनों को स्पष्ट निर्देश जारी किए। इसके बाद सभी जिलों में एक साथ कार्रवाई करते हुए संलग्नीकरण समाप्त कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने और मूल पदस्थापना प्रणाली को मजबूत करने के लिए लिया गया है।
संघ ने जताई आपत्ति, पुनर्विचार की मांग
इस निर्णय को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। संघ का तर्क था कि सरगुजा संभाग के कई दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में संलग्नीकरण के माध्यम से ही स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही थीं। ऐसे में अचानक इस व्यवस्था को समाप्त करने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
संघ ने संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं को पत्र सौंपकर निर्णय पर पुनर्विचार की मांग भी की, लेकिन शासन के स्पष्ट निर्देशों के चलते इस पर कोई राहत नहीं दी गई।
सबसे ज्यादा प्रभावित एमसीबी जिला
जारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 100 कर्मचारी एमसीबी जिले से संलग्न थे। इसके अलावा सूरजपुर, सरगुजा और बलरामपुर जिलों में भी बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। कई प्रभावशाली स्वास्थ्य कर्मी अपनी ऊंची पहुंच और प्रभाव के दम पर वर्षों से शहरी क्षेत्र में पदस्थ हैं।
📊 संलग्नीकरण का आंकड़ा
सरगुजा 69
जशपुर 63
एमसीबी 100
बलरामपुर 60
सूरजपुर 96
कोरिया 44
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कुल 432
“शासन के आदेश पर संभाग के सभी जिलों में संलग्नीकरण समाप्त कर दिया गया है। सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।”
डॉ. अनिल शुक्ला, संयुक्त संचालक स्वास्थ्य, सरगुजा संभाग
अब सभी कर्मचारी अपने मूल स्थान पर लौटेंगे, जिससे वहां स्टाफ की कमी दूर होने की उम्मीद है। हालांकि, जिन क्षेत्रों में संलग्नीकरण के सहारे स्वास्थ्य सेवाएं चल रही थीं, वहां नई व्यवस्था बनाने की चुनौती प्रशासन के सामने होगी। आने वाले दिनों में यह फैसला जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है, इस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।


















