Ayodhya Yagya Fire
Ayodhya Yagya Fire : राम नगरी अयोध्या में शनिवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह द्वारा आयोजित भव्य लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के समापन के ठीक बाद यज्ञशाला में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते एक एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला पूरा आयोजन स्थल धू-धू कर जल उठा। गनीमत यह रही कि यह घटना यज्ञ की पूर्णाहुति के करीब डेढ़ घंटे बाद हुई, जब पंडाल लगभग खाली हो चुका था। यदि यह आग कार्यक्रम के दौरान लगी होती, तो स्थिति भयावह हो सकती थी।
शनिवार दोपहर करीब 12 बजे अयोध्या के क्षीरेश्वरनाथ मंदिर के पास बने यज्ञ स्थल पर अचानक आग की लपटें उठने लगीं। चश्मदीदों के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को कुछ समझने का मौका नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में पूरा पंडाल जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गया। यह यज्ञ स्थल नवनिर्मित राम मंदिर से महज 800 मीटर की दूरी पर स्थित था। स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक पंडाल का अधिकांश हिस्सा जल चुका था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग लगने का कारण यज्ञ की अंतिम रस्मों के दौरान निकली एक चिंगारी को बताया जा रहा है। बताया गया कि यज्ञ पूर्ण होने के बाद जब एक नारियल फोड़ा गया, तो उससे निकली चिंगारी सीधे कपड़े से बने पंडाल के ऊपरी हिस्से पर जा गिरी। तेज हवा और ज्वलनशील सामग्री के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही कपड़े ने आग पकड़ी, वह पिघलकर नीचे गिरने लगा, जिससे पूरे एक एकड़ के क्षेत्र में आग फैल गई।
इस हादसे की सबसे राहत भरी बात यह रही कि यज्ञ का कार्यक्रम करीब डेढ़ घंटे पहले ही संपन्न हो चुका था। आयोजन के अंतिम दिन मंत्री दयाशंकर सिंह के इस 9 दिवसीय महायज्ञ में 50 हजार से अधिक श्रद्धालु और लगभग 5 हजार यजमान मौजूद थे। यदि यह चिंगारी मंत्रोच्चारण और आहुति के समय उठी होती, तो भगदड़ और आग की चपेट में आने से भारी जनहानि हो सकती थी। “संयोग अच्छा था कि लोग अपने घरों की ओर प्रस्थान कर चुके थे,” यज्ञ में शामिल एक यजमान ने राहत की सांस लेते हुए कहा।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह द्वारा आयोजित यह महायज्ञ काफी भव्य स्तर पर किया गया था। इस विशाल यज्ञशाला के भीतर कुल 1,251 हवन कुंड बनाए गए थे। नौ दिनों तक चले इस अनुष्ठान में देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संतों और विद्वानों का जमावड़ा लगा हुआ था। शनिवार को आखिरी दिन के पूजन के बाद सभी यजमानों ने पूर्ण आहुति दी थी। आग की इस घटना में यज्ञशाला का ढांचा और वहां रखा अन्य कीमती सामान पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया है।
राम मंदिर से मात्र 800 मीटर की दूरी पर हुए इस अग्निकांड ने सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने बड़े आयोजन में फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए थे, विशेषकर जब पंडाल जैसे अस्थायी ढांचे ज्वलनशील कपड़ों से बने हों। हालांकि, घटना के बाद मंत्री दयाशंकर सिंह और उनके समर्थकों ने भगवान का धन्यवाद किया कि कोई शारीरिक हानि नहीं हुई। अयोध्या पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम अब इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि आग लगने के सटीक तकनीकी कारणों का पता लगाया जा सके।
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