Ayodhya Ram Mandir
Ayodhya Ram Mandir: उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण के साथ ही अब आध्यात्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला तेज हो गया है। राम मंदिर के मुख्य शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा धर्म ध्वजा फहराए जाने के बाद, अब परिसर में स्थित अन्य प्रमुख ‘उप-मंदिरों’ के शिखरों को भी ध्वजा से सुसज्जित करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने निर्णय लिया है कि मुख्य मंदिर के चारों ओर और परिसर में बने छह अन्य देव मंदिरों पर पूरे विधि-विधान के साथ धर्म ध्वजा फहराई जाएगी। यह कदम मंदिर की पूर्णता और सनातन परंपरा के निर्वहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने शनिवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद उन छह मंदिरों के नामों की घोषणा की, जिनके शिखरों पर ध्वजारोहण किया जाना है। इन उप-मंदिरों में भगवान सूर्य, माता भगवती, भगवान शिव (शिवलिंग), प्रथम पूज्य गणपति, शेषावतार (लक्ष्मण जी का स्वरूप) और संकटमोचन हनुमान को समर्पित मंदिर शामिल हैं। चंपत राय के अनुसार, राम जन्मभूमि परिसर की परिकल्पना पंचायतन शैली और शास्त्रों के अनुसार की गई है, जहाँ मुख्य गर्भगृह के साथ-साथ इन सहायक देवताओं की उपस्थिति अनिवार्य है। इन मंदिरों पर ध्वजा फहराने के साथ ही परिसर की आध्यात्मिक आभा और अधिक जाज्वल्यमान हो उठेगी।
भगवान राम के अनन्य भक्त हनुमान जी के मंदिर के लिए ट्रस्ट ने एक विशेष तिथि का चयन किया है। आगामी 2 अप्रैल को हनुमान जयंती के पावन अवसर पर हनुमान मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराने की रस्म अदा की जाएगी। चंपत राय ने जानकारी दी कि रामभक्त हनुमान का ध्वज उनके प्राकट्य उत्सव के दिन फहराना भक्तों के लिए अत्यंत हर्ष का विषय होगा। इसके साथ ही, अन्य पांच उप-मंदिरों (सूर्य, भगवती, शिव, गणपति और शेषावतार) के लिए ध्वजारोहण की रस्में अलग-अलग चरणों में संपन्न होंगी। इसके लिए 22, 23, 24, 25, 29, 30 और 31 मार्च की तिथियां निर्धारित की गई हैं, ताकि हर देवता की रस्म को पूर्ण शुद्धता और शांति के साथ पूरा किया जा सके।
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और मर्यादा को ध्यान में रखते हुए ये कार्यक्रम बिना किसी बड़ी जनसभा या शोर-शराबे के आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक रस्म के दौरान शामिल होने वाले लोगों की संख्या को सीमित रखा गया है। चंपत राय के अनुसार, हर अनुष्ठान में लगभग 50 प्रतिष्ठित संत और करीब 200 विशिष्ट लोग ही शामिल होंगे। इन 200 लोगों की सूची में मुख्य रूप से वे इंजीनियर, शिल्पकार और मजदूर शामिल होंगे जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके इस भव्य ढांचे को खड़ा किया है। ट्रस्ट का मानना है कि इस परियोजना की सफलता के असली नायक यही श्रमिक हैं, इसलिए उन्हें इन धार्मिक आयोजनों का हिस्सा बनाना गर्व की बात है।
लेख के अंत में ट्रस्ट ने उस ऐतिहासिक पल को भी याद किया जब मंदिर के मुख्य शिखर पर पहली बार धर्म ध्वजा लहराई थी। महासचिव ने बताया कि मुख्य शिखर पर ध्वजारोहण की रस्म 25 नवंबर 2025 को स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी की थी। वह क्षण अयोध्या के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया था। अब उप-मंदिरों पर ध्वजा फहराने की यह प्रक्रिया उसी श्रृंखला का विस्तार है। चैत्र मास के इन अंतिम दिनों में अयोध्या एक बार फिर उत्सव के माहौल में डूबी नजर आएगी, जहाँ भक्त अपने आराध्य के साथ-साथ उनके सहायक देवताओं की वंदना भी कर सकेंगे।
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