Double PAN Card Case
Double PAN Card Case : उत्तर प्रदेश की सियासत में लंबे समय तक मजबूत दखल रखने वाले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए (MP-MLA) सेशन कोर्ट ने दोहरे पैन कार्ड (PAN Card) से जुड़े एक बेहद गंभीर मामले में दोनों नेताओं को तगड़ा झटका दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों दोषियों की जेल की सजा को बढ़ाते हुए अब पूरे 10 साल कर दिया है। इस न्यायिक फैसले के बाद सपा खेमे और आजम समर्थकों में एक बार फिर भारी निराशा छा गई है।
इस कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो इससे पहले नवंबर 2025 में विशेष एमपी-एमएलए (मजिस्ट्रेट) कोर्ट ने इस धोखाधड़ी मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम दोनों को दोषी करार दिया था। तब अदालत ने दोनों को 7-7 साल की कैद और 50-50 हजार रुपये के आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए आजम खान और उनके बेटे ने सेशन कोर्ट में अपील दायर कर राहत की गुहार लगाई थी। इसके विपरीत, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय विधायक आकाश सक्सेना ने दोषियों की सजा को नाकाफी बताते हुए इसे अधिकतम सीमा तक बढ़ाने के लिए सेशन कोर्ट में एक जवाबी याचिका दायर की थी।
सेशन कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकारी व अभियोजन पक्ष के वकीलों ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कड़ी दलीलें पेश कीं। अभियोजन पक्ष ने माननीय न्यायाधीश के सामने यह तर्क रखा कि आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पहले से ही फर्जी जन्म प्रमाण पत्र (Fake Birth Certificate) बनवाने के एक अन्य हाई-प्रोफाइल मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं और जेल की सजा काट रहे हैं। ऐसे में, अलग-अलग सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर करना उनके आदतन अपराध की श्रेणी में आता है। अभियोजन पक्ष की इसी मजबूत दलील और साक्ष्यों को आधार मानते हुए अदालत ने सजा में बढ़ोतरी के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी।
यह पूरा कानूनी विवाद मुख्य रूप से एक ही व्यक्ति द्वारा कूट रचित तरीके से दो अलग-अलग स्थाई खाता संख्या (पैन कार्ड) जारी करवाने से संबंधित है। मामले के अनुसार, अब्दुल्ला आजम के नाम पर दो अलग-अलग जन्मतिथियां दिखाकर दो पैन कार्ड तैयार करवाए गए थे। आरोप है कि इन फर्जी वित्तीय और व्यक्तिगत दस्तावेजों का जानबूझकर न केवल सरकारी कामों में इस्तेमाल किया गया, बल्कि विधानसभा चुनावों के दौरान चुनाव आयोग के समक्ष दाखिल किए जाने वाले आधिकारिक हलफनामों (Affidavits) में भी इन्हें सही दर्शाकर पेश किया गया, जो कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत अक्षम्य अपराध है।
धोखाधड़ी और जालसाजी का यह आपराधिक मुकदमा वर्ष 2019 में रामपुर के स्थानीय थाने में दर्ज कराया गया था। मामले की लंबी जांच के दौरान आयकर विभाग (Income Tax Department) के आधिकारिक रिकॉर्ड, पैन कार्ड आवंटन का डेटा, चुनावी हलफनामे और कई अन्य पुख्ता दस्तावेजी प्रमाण अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे। उल्लेखनीय है कि अब्दुल्ला आजम इससे पहले भी इसी जन्मतिथि विवाद के कारण अपनी विधायकी गंवा चुके हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके दस्तावेजों को अवैध पाते हुए उनकी उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्यता को पूरी तरह रद्द कर दिया था।
सपा के कद्दावर नेता रहे आजम खान पर रामपुर और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में जमीन कब्जाने, जालसाजी और भड़काऊ भाषण देने समेत दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज हैं। हाल ही में, वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और चुनाव ड्यूटी पर तैनात अमले के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक व अमर्यादित टिप्पणी करने के मामले में भी अदालत उन्हें दोषी करार दे चुकी है। हेट स्पीच के उस मामले में भी उन्हें 2 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी, जिसके कारण उनकी खुद की विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई थी।
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