Balochistan Army Operation
Balochistan Army Operation : पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत एक बार फिर भीषण हिंसा और सैन्य संघर्ष का गवाह बना है। अलग देश की मांग को लेकर दशकों से चल रहे बलूच आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना लगातार अभियान चला रही है, लेकिन इन अभियानों में सेना को भी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। ताजा घटनाक्रम में, बलूचिस्तान के बरखान जिले में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए एक सैन्य ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी सेना के एक मेजर सहित पांच सैनिकों की मौत हो गई है। पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ (ISPR) ने इस मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षा बलों ने विद्रोहियों के खिलाफ पूरी ताकत से जवाबी कार्रवाई की है।
बुधवार देर रात जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में ISPR ने बताया कि बरखान के नोशाम इलाके में पाकिस्तानी सेना और बलूचिस्तान फ्रंटियर कोर द्वारा एक संयुक्त ‘क्लीन-अप’ ऑपरेशन शुरू किया गया था। जैसे ही सुरक्षा बल संदिग्ध ठिकानों की ओर बढ़े, वहां छिपे आतंकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस भीषण मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने कम से कम 7 आतंकवादियों को मार गिराया। हालांकि, इस दौरान एक फील्ड ऑफिसर (मेजर) और चार जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी। सेना ने दावा किया है कि मारे गए आतंकवादियों के कब्जे से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है।
पाकिस्तानी सुरक्षा बल इस साल बलूच विद्रोहियों और अन्य आतंकी समूहों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही बलूचिस्तान के विभिन्न हिस्सों में कई बड़े सैन्य ऑपरेशन चलाए जा चुके हैं। इससे पहले मार्च महीने में हरनाई और बासीमा जिलों में की गई कार्रवाई के दौरान 15 आतंकी मारे गए थे, जबकि फरवरी में झोब जिले में 10 विद्रोहियों का सफाया किया गया था। सेना का कहना है कि वे प्रांत में सरकारी बुनियादी ढांचे और सुरक्षा चौकियों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन बलूच विद्रोही समूह भी लगातार अपनी रणनीति बदल रहे हैं।
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम विकसित और अशांत प्रांत माना जाता है। यहाँ लंबे समय से बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे संगठन ‘आजाद बलूचिस्तान’ के लिए सशस्त्र विद्रोह कर रहे हैं। पाकिस्तानी सरकार इन हमलों के लिए न केवल BLA बल्कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को भी जिम्मेदार ठहराती है। विद्रोहियों का तर्क है कि पाकिस्तान उनके प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा है, जबकि प्रांत के लोग गरीबी और अभाव में जी रहे हैं। इसी असंतोष के कारण सुरक्षा बलों और विद्रोहियों के बीच ‘कम तीव्रता वाला’ युद्ध सालों से जारी है, जिसने अब एक हिंसक रूप ले लिया है।
केवल बलूचिस्तान ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान का उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा भी आतंक की आग में जल रहा है। बरखान की घटना से दो दिन पहले लक्की मरवत जिले के नौरंग बाजार में एक भयावह आत्मघाती हमला हुआ। एक हमलावर ने विस्फोटक से लदे ऑटो रिक्शा को भीड़-भाड़ वाले बाजार में उड़ा दिया। इस धमाके में 2 यातायात पुलिसकर्मियों और एक महिला सहित 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 33 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र की विफलताओं को एक बार फिर जगजाहिर कर दिया है।
लगातार हो रहे हमलों और सैन्य अभियानों के कारण पाकिस्तान में डर का माहौल है। एक तरफ जहां सेना ‘क्लीन-अप’ ऑपरेशन के जरिए नियंत्रण पाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिक आत्मघाती हमलों और आपसी गोलाबारी के बीच पिस रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सैन्य अभियानों से बलूचिस्तान की समस्या का समाधान संभव नहीं है, इसके लिए राजनीतिक संवाद और क्षेत्रीय विकास की भी आवश्यकता है। फिलहाल, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा की सीमाओं पर तनाव अपने चरम पर है और सेना ने अपनी चौकसी और बढ़ा दी है।
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