Baloda Bazar Violence Case
Baloda Bazar Violence Case : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित बलौदा बाजार आगजनी और हिंसा मामले में कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल को मंगलवार को कड़े सुरक्षा घेरे के बीच जिला न्यायालय में पेश किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गिरीश पाल सिंह की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें 30 मार्च 2026 तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वर्तमान में रायपुर सेंट्रल जेल में बंद बघेल को पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट के आधार पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया था। यह गिरफ्तारी अपराध क्रमांक 383/2024 के तहत की गई है, जो 10 जून 2024 को हुई हिंसा से जुड़ा एक नया मोड़ है।
बलौदा बाजार में हुई अभूतपूर्व आगजनी और तोड़फोड़ की घटना के बाद से पुलिस प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है। अब तक इस मामले में 200 से अधिक उपद्रवियों और साजिशकर्ताओं को चिन्हित कर गिरफ्तार किया जा चुका है। कोतवाली थाने में इस पूरी घटना को लेकर कुल 13 अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। पुलिस का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान अभी भी जारी है। अमित बघेल की भूमिका की जांच कई अलग-अलग प्रकरणों में की जा रही है, जिसके कारण उन्हें बार-बार अदालती रिमांड का सामना करना पड़ रहा है।
इस मामले में पुलिस ने केवल अमित बघेल ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय यादव पर भी शिकंजा कसा है। मंगलवार को इन दोनों दिग्गज नेताओं को कोर्ट में एक साथ पेश किया गया। जांच अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों नेताओं के खिलाफ अपराध क्रमांक 378, 379, 380 और अब 383/2024 के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ को उकसाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने में इन नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि, बचाव पक्ष इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है।
न्यायालय परिसर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए अमित बघेल ने खुद को निर्दोष बताया और इसे सरकार का राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने दावा किया कि जिस वक्त बलौदा बाजार में हिंसा भड़की थी, उस समय वे रजिस्ट्रार कार्यालय में अपनी पत्नी के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए बच्चों के साथ मौजूद थे। बघेल ने भावुक होते हुए कहा, “चाहे सरकार हमें फांसी पर टांग दे, लेकिन हम छत्तीसगढ़ के अधिकारों और आजादी की लड़ाई जारी रखेंगे।” उनके अधिवक्ता सुरेश वर्मा ने भी आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर किस्तों में नए मामले दर्ज कर रही है ताकि उनकी रिहाई में बाधा डाली जा सके।
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता चंद्रकांत यदु ने इस पूरी कार्रवाई को ‘षड्यंत्रपूर्ण’ बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि घटना के करीब 20 महीने बाद इन नेताओं की गिरफ्तारी किस आधार पर की गई है। पार्टी का आरोप है कि जैसे ही किसी एक मामले में जमानत मिलने की संभावना बनती है, पुलिस तुरंत एक नया मुकदमा दायर कर देती है। उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया केवल नेताओं को जेल के भीतर रखने और उनके राजनीतिक आधार को कमजोर करने के उद्देश्य से की जा रही है। मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी, जिस पर प्रदेश की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
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