Baloda Bazar Violence Case: बलौदाबाजार हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद छत्तीसगढ़ क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल बुधवार को रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। करीब आठ महीने तक जेल में रहने के बाद उनकी रिहाई पर समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। जेल परिसर के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक पहले से मौजूद थे, जिन्होंने आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया और नारेबाजी करते हुए उनका स्वागत किया। पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल नजर आया।

रिहाई के बाद न्यायपालिका पर जताया भरोसा
जेल से बाहर आने के बाद अमित बघेल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और उन्हें विश्वास था कि उन्हें न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब वे दोबारा जनता के बीच जाएंगे और अपने सामाजिक तथा राजनीतिक अभियानों को पहले की तरह आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में लोगों ने उनका साथ दिया और यही विश्वास उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता है।

महापुरुषों को श्रद्धांजलि देकर दिया राजनीतिक संदेश
रिहाई के तुरंत बाद अमित बघेल सबसे पहले महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमाओं पर पहुंचे। वहां उन्होंने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों को प्रेरणास्रोत बताया। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर हाथ में लेकर समर्थकों का अभिवादन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने उनके समर्थन में नारे लगाए। उनके इस कदम को राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
2028 को लेकर किया बड़ा राजनीतिक दावा
मीडिया से बातचीत के दौरान अमित बघेल ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के अधिकार, सम्मान और स्थानीय हितों के लिए है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2028 में प्रदेश की जनता बदलाव का फैसला करेगी और राज्य में छत्तीसगढ़ियावादी सोच वाली सरकार बनेगी। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है और विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है।
क्या है बलौदाबाजार हिंसा का पूरा मामला?
बलौदाबाजार हिंसा की घटना 10 जून 2024 को हुई थी। उस दिन बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में एक सामाजिक मुद्दे को लेकर बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे। आरोप है कि सभा के दौरान दिए गए कुछ भाषणों के बाद भीड़ उग्र हो गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टोरेट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर मार्च किया, जहां तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं।
घटना के दौरान कई सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और कई लोगों को आरोपी बनाया।
हिंसा में कई पुलिसकर्मी भी हुए थे घायल
प्रदर्शन के दौरान हालात इतने बिगड़ गए थे कि भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़कर सरकारी परिसरों में प्रवेश करने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान पथराव और हिंसक झड़पें हुईं। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर लाठी, पत्थर और लोहे की रॉड से हमला किया, जिससे कई अधिकारी और जवान घायल हो गए।
जांच के दौरान पुलिस ने विभिन्न साक्ष्यों के आधार पर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें अमित बघेल का नाम भी शामिल था। मामला बाद में अदालत पहुंचा और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत प्रदान की।
रिहाई के बाद राजनीतिक चर्चाएं हुईं तेज
अमित बघेल की रिहाई के साथ ही उनके राजनीतिक बयान भी चर्चा का केंद्र बन गए हैं। 2028 में छत्तीसगढ़ियावादी सरकार बनने के उनके दावे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इस बयान का असर राज्य की क्षेत्रीय राजनीति पर देखने को मिल सकता है।
वहीं, बलौदाबाजार हिंसा मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है और अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। ऐसे में अमित बघेल की जमानत, उनकी रिहाई और उसके बाद दिए गए राजनीतिक बयान को इस पूरे मामले के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और राजनीतिक घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी रहेगी।
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