Balrampur Crisis
Balrampur Crisis: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के हंसपुर में उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब पुलिस हत्या के आरोपी और निलंबित एसडीएम करुण डहरिया को जांच के लिए घटनास्थल पर लेकर पहुंची। जैसे ही ग्रामीणों को इस बात की भनक लगी कि उनके साथी की जान लेने वाला मुख्य आरोपी गांव में आया है, सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एकजुट हो गए। आक्रोशित भीड़ ने पुलिस के वाहन को चारों तरफ से घेर लिया और “हत्यारे को फांसी दो” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा, ताकि जांच प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से पूरा किया जा सके।
तत्कालीन एसडीएम करुण डहरिया फिलहाल अंबिकापुर सेंट्रल जेल में निरुद्ध हैं। बलरामपुर पुलिस ने मामले की गहराई से जांच और पूछताछ के लिए न्यायालय से उनकी तीन दिनों की पुलिस रिमांड मांगी थी, जिसे 30 मार्च को मंजूर किया गया था। जांच अधिकारी और कुसमी एसडीओपी आशीष कुंजाम के नेतृत्व में पुलिस टीम आरोपी को लेकर हंसपुर पहुंची थी। पुलिस का मुख्य उद्देश्य अपराध की कड़ियों को जोड़ना और घटनास्थल का मुआयना कर आरोपी का बयान दर्ज करना था। हालांकि, ग्रामीणों के जबरदस्त विरोध के कारण पुलिस को करीब एक घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी, जिसके बाद समझाइश देकर रास्ता साफ कराया गया।
यह पूरा विवाद 14 फरवरी 2026 की रात को शुरू हुआ था। हंसपुर क्षेत्र में झारखंड के तस्करों द्वारा बॉक्साइट का अवैध उत्खनन किया जा रहा था, जिसका स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से विरोध कर रहे थे। उसी रात ग्रामीणों ने बॉक्साइट से लदे एक ट्रक को रोक लिया। सूचना मिलते ही तत्कालीन कुसमी एसडीएम करुण डहरिया अपने कुछ निजी गुर्गों के साथ वहां पहुंचे। आरोप है कि अवैध उत्खनन रोकने से नाराज एसडीएम और उनके साथियों ने तीन ग्रामीणों की बर्बरतापूर्वक पिटाई कर दी। इसके बाद उन्हें जबरन गाड़ी में बिठाकर कुसमी ले जाया जाने लगा, लेकिन रास्ते में ही 60 वर्षीय बुजुर्ग ग्रामीण राम नरेश राम ने दम तोड़ दिया।
इस जघन्य हत्याकांड के बाद राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करुण डहरिया को पद से निलंबित कर दिया था। कोरंधा थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर एसडीएम समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। घायलों में अजीत उरांव और आकाश अगरिया शामिल थे, जिनका लंबा इलाज चला। पुलिस अब चार्जशीट पेश करने की अंतिम तैयारी में है। जांच टीम ने बताया कि तीन दिनों की रिमांड अवधि आज 1 अप्रैल को समाप्त हो गई है और पूछताछ के बाद मुख्य आरोपी को वापस अंबिकापुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया है।
हंसपुर के ग्रामीणों का कहना है कि एक प्रशासनिक अधिकारी द्वारा रक्षक की जगह भक्षक बनना लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। ग्रामीणों ने पुलिस अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि वे जांच में सहयोग तभी करेंगे जब उन्हें निष्पक्ष न्याय का भरोसा दिलाया जाएगा। पुलिस ने लोगों को आश्वस्त किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी वैज्ञानिक और चश्मदीद साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। रिमांड के दौरान दर्ज किए गए बयानों को केस डायरी का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि न्यायालय में आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।
बलरामपुर की इस घटना ने छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी का नाम हत्या जैसे संगीन मामले में आना और उनके द्वारा अवैध उत्खनन को संरक्षण देने के आरोपों ने सरकार की छवि पर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल, हंसपुर में शांति है लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। वे अब पुलिस द्वारा दाखिल की जाने वाली चार्जशीट और अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, ताकि राम नरेश राम के परिवार को इंसाफ मिल सके। यह मामला प्रदेश में सत्ता और पद के दुरुपयोग के विरुद्ध एक बड़ी नजीर बन गया है।
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