छत्तीसगढ़

Opium Smuggling : बलरामपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, झारखंड से अफीम तस्करी का चौथा आरोपी गिरफ्तार

Opium Smuggling : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। कोरंधा थाना क्षेत्र के ग्राम तुर्रीपानी खजूरी में बड़े पैमाने पर की जा रही अफीम की खेती के मामले में पुलिस ने अंतरराज्यीय नेटवर्क के चौथे कड़ी को झारखंड से दबोच लिया है। पुलिस की ‘एंड-टू-एंड’ जांच प्रक्रिया के तहत की गई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अफीम की तस्करी की जड़ें पड़ोसी राज्यों तक कितनी गहराई से फैली हुई हैं।

झारखंड के चतरा जिले से दबोचा गया मुख्य सहयोगी राजन यादव

बलरामपुर पुलिस की टीम ने अफीम तस्करी मामले के चौथे आरोपी राजन यादव (38 वर्ष) को 9 अप्रैल 2026 को झारखंड के चतरा जिले से गिरफ्तार किया। राजन यादव, चतरा जिले के थाना कुन्दा अंतर्गत ग्राम चाया का निवासी है। पुलिस के अनुसार, आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था और पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, सटीक मुखबिर तंत्र और तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस ने उसे घेराबंदी कर धर दबोचा। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर छत्तीसगढ़ लाकर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

2 करोड़ रुपये मूल्य की अफीम फसल का हुआ था खुलासा

इस पूरे सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश 12 मार्च 2026 को हुआ था। मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (कुसमी) के नेतृत्व में पुलिस, एफएसएल और प्रशासनिक टीम ने ग्राम तुर्रीपानी खजूरी में छापा मारा था। वहां सहादुर नगेशिया और दुईला नगेशिया के खेतों में बड़े पैमाने पर अफीम की लहलहाती फसल मिली। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 1883.76 किलोग्राम अफीम की फसल (जड़, तना, फूल और फल सहित) जब्त की थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस भारी मात्रा में जब्त मादक पदार्थ की कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई है।

लालच देकर झारखंड के तस्करों ने आदिवासियों को फंसाया

जांच में यह बेहद गंभीर तथ्य सामने आया है कि झारखंड के तस्करों ने स्थानीय ग्रामीणों को आर्थिक तंगी का फायदा उठाकर अपने जाल में फंसाया था। गिरफ्तार आरोपी भूपेन्द्र उरांव (झारखंड) ने स्थानीय ग्रामीण सहादुर और दुईला नगेशिया को अधिक पैसा कमाने का लालच दिया और उनसे अवैध अफीम की खेती करवाई। भूपेन्द्र उरांव को पुलिस पहले ही 15 मार्च को गिरफ्तार कर चुकी है। भूपेन्द्र से हुई कड़ी पूछताछ के दौरान ही राजन यादव का नाम सामने आया था, जिसे फसल की बिक्री और सप्लाई चेन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

एंड-टू-एंड विवेचना के जरिए पूरे सिंडिकेट पर नजर

बलरामपुर पुलिस इस मामले को केवल स्थानीय खेती तक सीमित नहीं मान रही है। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर इस केस की ‘एंड-टू-एंड’ विवेचना की जा रही है। इसका उद्देश्य अफीम की खेती के लिए फंडिंग करने वालों, बीज मुहैया कराने वालों और तैयार माल को देश के अन्य हिस्सों में खपाने वाले मुख्य सरगनाओं तक पहुँचना है। पुलिस का मानना है कि राजन यादव की गिरफ्तारी से इस सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन और तस्करी के नए रूटों का खुलासा होगा।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मादक पदार्थों के खिलाफ सख्त रुख

बलरामपुर जिले के सीमावर्ती इलाकों में इस तरह की अवैध खेती का मिलना सुरक्षा और सामाजिक दृष्टि से चिंता का विषय है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय किसी भी अवैध नेटवर्क को पनपने नहीं दिया जाएगा। कोरंधा थाना में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 और 18 के तहत दर्ज इस मामले में आगे और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन में आकर अवैध खेती न करें, अन्यथा उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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