POCSO Case
POCSO Case : केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे बंदी भगीरथ से जुड़ा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। केंद्रीय मंत्री बंडी संजय ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस बात की आधिकारिक जानकारी साझा की है कि उन्होंने अपने बेटे भगीरथ को जांच प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए पुलिस के सुपुर्द कर दिया है। मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें देश की कानून व्यवस्था और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उनके अनुसार, उनकी लीगल टीम ने मामले के सभी पहलुओं और सबूतों का बारीकी से अध्ययन किया है और उन्हें पूरा विश्वास है कि उनके बेटे को जल्द ही इस मामले में जमानत मिल जाएगी। उन्होंने दोहराया कि कानून के सामने हर नागरिक बराबर है, चाहे वह किसी भी पद पर हो।
अपने बेटे के खिलाफ दर्ज हुए गंभीर मामले पर खुलकर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने कहा, “आज मैंने अपने वकील के माध्यम से अपने बेटे बंदी भगीरथ को जांच के लिए पुलिस को सौंप दिया है। जब इस मामले में शिकायत दर्ज की गई थी, तभी मैंने तय कर लिया था कि भगीरथ को पुलिस के सामने पेश होना चाहिए। मेरा बेटा लगातार यही कह रहा है कि वह निर्दोष है और उसने कोई गलत काम नहीं किया है।” मंत्री ने सरेंडर में हुई देरी का कारण बताते हुए कहा कि उन्होंने मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक दस्तावेज और सबूत अपनी कानूनी टीम को सौंपे थे। वकीलों के आश्वासन के बाद ही आगे का कदम उठाया गया। उन्होंने न्यायपालिका के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त की।
दूसरी ओर, तेलंगाना पुलिस का इस पूरे घटनाक्रम पर एक बिल्कुल अलग दावा सामने आया है। साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर रमेश ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत नामजद आरोपी बंदी भगीरथ को हैदराबाद शहर के बाहरी इलाके, नारसिंगी पुलिस एकेडमी के पास से हिरासत में लिया गया है। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि यह कोई स्वैच्छिक सरेंडर या आत्मसमर्पण नहीं था, बल्कि पुलिस द्वारा की गई एक ठोस कार्रवाई और गिरफ्तारी थी। पुलिस ने बताया कि आरोपी के देश छोड़कर भागने की आशंका को देखते हुए उसके खिलाफ पहले ही ‘लुक-आउट सर्कुलर’ (LOC) जारी कर दिया गया था, ताकि वह कानून की गिरफ्त से बाहर न जा सके।
इस संवेदनशील मामले ने अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले लिया है और तेलंगाना की सियासत में भूचाल आ गया है। तेलंगाना रक्षा सेना की अध्यक्ष के. कविता ने इस मामले को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने मांग की है कि निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए बंडी संजय कुमार को तुरंत केंद्रीय मंत्रिमंडल (गृह राज्य मंत्री के पद) से बर्खास्त किया जाना चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि केंद्रीय मंत्री के पद पर रहते हुए पुलिस और गवाहों पर दबाव बनाया जा सकता है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में बाधा आ सकती है।
पुलिस कार्रवाई से पहले बंदी भगीरथ ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी रास्ता अपनाया था, लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा हाथ लगी। तेलंगाना उच्च न्यायालय (High Court) ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भगीरथ को किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत या अग्रिम जमानत देने से साफ तौर पर इनकार कर दिया था। अदालत से झटका लगने के ठीक एक दिन बाद केंद्रीय मंत्री का यह बयान आया। बंडी संजय के अनुसार, उनके वकीलों का दृढ़ विश्वास था कि यह मामला कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है और इसे अदालत द्वारा खारिज कर दिया जाएगा, इसी कानूनी राय और विचार-विमर्श के कारण पुलिस के सामने पेश होने में कुछ दिनों की देरी हुई।
उल्लेखनीय है कि भगीरथ के खिलाफ यह पूरा मामला बीती 8 मई को दर्ज किया गया था। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की बेहद सख्त और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। यह एफआईआर एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की की मां की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भगीरथ के उनकी नाबालिग बेटी के साथ संबंध थे और उसने शादी का झांसा देकर या प्रभाव का इस्तेमाल कर लड़की का शारीरिक और यौन उत्पीड़न किया। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने और साक्ष्य जुटाने में व्यस्त है।
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