Bangladesh Violence : पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक बार फिर सांप्रदायिक हिंसा और तनाव की विचलित करने वाली खबरें सामने आ रही हैं। शनिवार को देश के दो अलग-अलग हिस्सों में भड़की हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कथित तौर पर इस्लाम के अपमान के आरोपों को आधार बनाकर भीड़ ने जमकर उत्पाद मचाया। ढाका से करीब 300 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम में स्थित रंगपुर क्षेत्र में स्थिति उस समय बेकाबू हो गई जब एक मुस्लिम युवक की मौत के बाद गुस्साई भीड़ ने हिंदू समुदाय को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस दौरान न केवल हिंदू परिवारों के घरों में घुसकर तोड़फोड़ की गई, बल्कि उनके व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया।

पुराना विवाद या सोची-समझी साजिश? रकीब हसन की हत्या का सच
रंगपुर में हुई इस हिंसा की जड़ में रकीब हसन नामक व्यक्ति की हत्या को बताया जा रहा है। हालांकि, पुलिस की प्राथमिक जांच एक अलग ही कहानी बयां कर रही है। रंगपुर पुलिस आयुक्त मोहम्मद मजीद अली के अनुसार, यह हत्या किसी धार्मिक विवाद के कारण नहीं, बल्कि एक पुराने व्यक्तिगत झगड़े का परिणाम थी। पुलिस ने इस मामले में मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल मोहम्मद मोमिन नामक व्यक्ति की संलिप्तता का संदेह जताया है। स्थानीय मीडिया ‘प्रोथोम आलो’ की रिपोर्ट के अनुसार, हत्या के बाद कुछ शरारती तत्वों ने मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की। ऐसा इसलिए किया गया ताकि पुलिस का ध्यान असली कातिलों से हटकर सांप्रदायिक दंगों की ओर चला जाए।
दसपारा बाजार में दहशत का माहौल: हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमला
हिंसा का मुख्य केंद्र दसपारा बाजार क्षेत्र रहा, जहां हिंदू समुदाय के लगभग सौ से अधिक लोग निवास करते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ ने अचानक हमला बोल दिया, जिससे जान बचाने के लिए लोगों को इधर-उधर भागना पड़ा। हमलावरों ने घरों के कीमती सामान लूट लिए और दुकानों में आगजनी की कोशिश की। पीड़ित हिंदू परिवारों का कहना है कि उनका किसी भी व्यक्ति या समुदाय के साथ कोई विवाद नहीं था, फिर भी उन्हें बिना किसी कारण के निशाना बनाया गया। फिलहाल पूरा इलाका दहशत के साये में है और लोग अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
सांप्रदायिक हिंसा के डरावने आंकड़े: तीन महीने में 133 घटनाएं
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर काम करने वाली संस्था ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ ने बेहद चिंताजनक आंकड़े पेश किए हैं। परिषद के मुताबिक, इस वर्ष 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच देश में सांप्रदायिक हिंसा की कुल 133 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत और हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से अपील की है कि इन घटनाओं को महज ‘छिटपुट वारदात’ मानकर नजरअंदाज न किया जाए, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की अपील: अफवाहों से बचें और शांति बनाए रखें
बिगड़ते हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी है। पुलिस महानिरीक्षक ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और आपसी भाईचारा बनाए रखें। सामाजिक संगठनों ने भी समुदायों के बीच संवाद (Dialogue) बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है ताकि खोया हुआ भरोसा वापस कायम हो सके। फिलहाल, रंगपुर में पुलिस की गश्त जारी है और असली आरोपियों की पहचान के लिए डिजिटल साक्ष्यों की मदद ली जा रही है।


















