Bangladesh Election 2026 : बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले ऐतिहासिक आम चुनावों से ठीक पहले देश का राजनीतिक तापमान चरम पर है। इसी कड़ी में इस्लामिक रूढ़िवादी दल जमात-ए-इस्लामी ने बुधवार को अपना चुनावी घोषणापत्र (Manifesto) जारी कर सबको चौंका दिया है। पार्टी ने अपने घोषणापत्र में एक संतुलित और समावेशी विदेश नीति का खाका पेश किया है। जमात ने स्पष्ट किया है कि यदि वह सत्ता में आती है, तो भारत सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ ‘रचनात्मक, सहयोगात्मक और सम्मानजनक’ संबंध बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अतीत में जमात की छवि कट्टरपंथी और भारत-विरोधी रही है।
क्षेत्रीय शांति और सहयोग का नया रोडमैप: पड़ोसियों से दोस्ती पर जोर
जमात-ए-इस्लामी के घोषणापत्र के अनुसार, पार्टी दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों—भारत, भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाईलैंड के साथ शांतिपूर्ण और मित्रतापूर्ण संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहती है। पार्टी ने साझा समृद्धि और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निरंतर संवाद और निष्पक्षता को आधार बनाने का संकल्प लिया है। घोषणापत्र में कहा गया है कि ये रिश्ते किसी दबाव में नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और साझा हितों की बुनियाद पर टिके होंगे, जिससे पूरे क्षेत्र में आर्थिक विकास के नए द्वार खुलेंगे।
पासपोर्ट की गरिमा और वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने का संकल्प
विदेश नीति के अलावा, जमात-ए-इस्लामी ने बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय छवि को सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया है। पार्टी ने वादा किया है कि वह बांग्लादेशी पासपोर्ट की वैश्विक रैंकिंग और स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाएगी। घोषणापत्र में कहा गया है कि वीजा मुक्त यात्रा और अंतरराष्ट्रीय यात्रा सुविधाओं को सुगम बनाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किए जाएंगे। इसका उद्देश्य न केवल पर्यटन को बढ़ावा देना है, बल्कि विदेशों में रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों और छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा को अधिक सम्मानजनक और सुविधाजनक बनाना भी है।
मुस्लिम देशों से नजदीकी और वैश्विक कूटनीति का विस्तार
घोषणापत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि मुस्लिम देशों (OIC) के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करना जमात की विदेश नीति का मुख्य स्तंभ होगा। हालांकि, पार्टी ने खुद को केवल मुस्लिम जगत तक सीमित नहीं रखा है। जमात ने पूर्वी यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के उभरते बाजारों और देशों के साथ भी मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध स्थापित करने की योजना पेश की है। यह दर्शाता है कि पार्टी वैश्विक स्तर पर बांग्लादेश को एक बहुआयामी खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की इच्छुक है।
रोहिंग्या संकट का समाधान और संयुक्त राष्ट्र में सक्रियता
जमात-ए-इस्लामी ने वैश्विक मंचों, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र (UN) में बांग्लादेश की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने का संकल्प लिया है। घोषणापत्र में रोहिंग्या शरणार्थी संकट को एक मानवीय त्रासदी बताते हुए इसके स्थाई समाधान का वादा किया गया है। पार्टी का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग से रोहिंग्याओं की उनके वतन म्यांमार में ‘सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वैच्छिक’ वापसी सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में बांग्लादेशी सैनिकों की गौरवशाली भागीदारी को जारी रखने और उसे और सशक्त बनाने की बात भी कही गई है।
सत्ता परिवर्तन के बाद का पहला चुनाव: एक निर्णायक मोड़
यह घोषणापत्र एक ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश अपने राजनीतिक इतिहास के सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। जुलाई 2024 के जनआंदोलन और शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद, यह पहला बड़ा चुनाव है। आवामी लीग की अनुपस्थिति में अब मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के बीच माना जा रहा है। 12 फरवरी का मतदान न केवल नई सरकार का चुनाव करेगा, बल्कि देश के भविष्य की दिशा और दशा भी तय करेगा।
















