Bangladesh Election
Bangladesh election violence: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों से ठीक पहले देश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह अशांत और हिंसक हो चुका है। हाल ही में कॉक्स बाजार के टेकनाफ इलाके में एक चुनावी सभा के दौरान अज्ञात हमलावरों द्वारा की गई अंधाधुंध गोलीबारी ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस हिंसक हमले ने न केवल आम नागरिकों में डर का माहौल पैदा कर दिया है, बल्कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के आयोजन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा के इन बढ़ते आंकड़ों को लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।
गुरुवार रात करीब साढ़े आठ बजे, कॉक्स बाजार स्थित टेकनाफ उपजिला के अली खली रोहिंग्या कैंप इलाके में उस समय अफरातफरी मच गई जब एक प्रचार वाहन पर अचानक गोलियां चलाई गईं। स्थानीय पुलिस के अनुसार, हमलावरों ने एक ट्रक को निशाना बनाया जिस पर चुनाव प्रचार सामग्री लदी थी और समर्थक मौजूद थे। इस हमले में एक मासूम बच्चे समेत कुल पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में दो रोहिंग्या शरणार्थी और तीन स्थानीय बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। टेकनाफ मॉडल पुलिस स्टेशन के ओसी मोहम्मद सैफुल इस्लाम ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हमलावरों की तलाश जारी है।
मानवाधिकार संगठन ‘ऐन ओ सालिश केंद्र’ (ASK) की ताजा रिपोर्ट ने बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा की भयावह तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 की तुलना में जनवरी 2026 में राजनीतिक हिंसा में जबरदस्त उछाल आया है। जनवरी माह में ही हिंसा की कुल 75 बड़ी घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 616 लोग घायल हुए और 11 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसकी तुलना में दिसंबर 2025 में केवल 18 घटनाएं हुई थीं। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे संघर्ष और भी खूनी होता जा रहा है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि 22 जनवरी से औपचारिक चुनाव प्रचार शुरू होने के बाद से ही स्थिति बिगड़नी शुरू हुई है। 21 से 31 जनवरी के बीच मात्र दस दिनों के भीतर 49 हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें 4 लोगों की मौत और 414 लोग घायल हुए। इस राजनीतिक लड़ाई में अब पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में 16 पत्रकारों पर हमले किए गए, जबकि दिसंबर में यह संख्या 11 थी। स्वतंत्र मीडिया पर बढ़ते ये हमले लोकतांत्रिक मूल्यों के पतन की ओर इशारा कर रहे हैं।
देश की वर्तमान स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए विभिन्न मानवाधिकार समूहों ने राजनीतिक दलों से संयम बरतने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और चुनाव लड़ रहे दलों की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। आने वाले मतदान को सफल बनाने के लिए सभी पक्षों का शांतिपूर्ण सहयोग अनिवार्य है।
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