Bangladesh Unrest
Bangladesh Extremism: बांग्लादेश, जिसका जन्म 1971 में धर्मनिरपेक्षता, भाषाई गौरव और लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर हुआ था, आज एक वैचारिक चौराहे पर खड़ा है। शेख मुजीबुर रहमान के सपनों का समावेशी देश अब हिंसा, कट्टरपंथ और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों के कारण वैश्विक चिंता का विषय बन गया है।
कट्टरपंथ का अर्थ किसी विचारधारा या धर्म की ऐसी संकीर्ण व्याख्या है, जहाँ असहिष्णुता और हिंसा को जायज ठहराया जाता है। बांग्लादेश के संदर्भ में, यह उस मानसिकता का उदय है जो देश की धर्मनिरपेक्ष छवि को मिटाकर इसे एक कट्टर इस्लामी राष्ट्र में बदलना चाहती है। यह बिल्कुल वैसा ही रास्ता है जैसा पाकिस्तान ने अपनाया, जिसके परिणामस्वरूप वहां लोकतंत्र कमजोर हुआ और धार्मिक कट्टरता शासन पर हावी हो गई।
हालिया तनाव की मुख्य वजह युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत है। हादी, जिन्होंने शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए विद्रोह में सक्रिय भूमिका निभाई थी, को ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी। इलाज के दौरान सिंगापुर में उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने जलते हुए बांग्लादेश में घी का काम किया है, जिससे देश भर में हिंसक प्रदर्शनों और आगजनी का दौर फिर से शुरू हो गया है।
बांग्लादेश में हिंसा के पीछे मुख्य कारण गहरा राजनीतिक ध्रुवीकरण है। अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के बीच सत्ता का संघर्ष अक्सर सड़कों पर खूनी झड़पों का रूप ले लेता है। इसके साथ ही, कट्टरपंथी संगठन धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाकर अशांति फैलाते हैं। जब भी राजनीतिक अस्थिरता होती है, ये ताकतें सक्रिय होकर लोकतांत्रिक ढांचे को चोट पहुँचाती हैं।
बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्षता के लिए सबसे बड़ा खतरा वे संगठन हैं जो शरीयत आधारित शासन की वकालत करते हैं:
जमात-ए-इस्लामी: यह सबसे पुराना संगठन है जिस पर 1971 में पाकिस्तानी सेना की मदद करने के आरोप हैं। यह एक इस्लामी राज्य की स्थापना का लक्ष्य रखता है।
हिफाजत-ए-इस्लाम: यह मदरसों से जुड़ा देवबंदी संगठन है। यह महिला अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का कड़ा विरोधी है।
अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT): अल-कायदा से प्रेरित यह आतंकी संगठन ब्लॉगरों और बुद्धिजीवियों की हत्या के लिए कुख्यात है।
जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB): यह संगठन लोकतांत्रिक व्यवस्था को ‘गैर-इस्लामी’ मानता है और देश में बम धमाकों जैसी आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है।
इन संगठनों की कार्यप्रणाली और विचारधारा पाकिस्तान के कट्टरपंथी ढांचे से मेल खाती है। यदि बांग्लादेश इसी राह पर बढ़ता रहा, तो वहां भी अल्पसंख्यकों के अधिकार समाप्त हो जाएंगे और लोकतंत्र केवल नाम का रह जाएगा। इसका सीधा असर भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ेगा। आतंकवाद, घुसपैठ और सीमा सुरक्षा जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।बांग्लादेश को अपनी पहचान बचाने के लिए न केवल इन कट्टरपंथी ताकतों को कुचलना होगा, बल्कि समाज में लोकतांत्रिक और समावेशी मूल्यों को फिर से जीवित करना होगा। एक स्थिर और धर्मनिरपेक्ष बांग्लादेश ही दक्षिण एशिया की शांति की गारंटी है।
Ambikapur News: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में आयोजित हो रहे नेशनल ट्राइबल गेम्स…
Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की…
Durg Fire News: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से लापरवाही की एक ऐसी खबर सामने आई…
Bengaluru Crime: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर…
US Protests: मध्य-पूर्व में गहराते युद्ध के बादलों और ईरान के साथ बढ़ते सैन्य संघर्ष…
US-Iran Conflict: मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ी खबर सामने…
This website uses cookies.