Bangladesh Hindu Attack
Bangladesh Hindu Attack: पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का भयावह दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कई दिनों से देश के विभिन्न हिस्सों में हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। कट्टरपंथियों की हिंसक भीड़ द्वारा किए जा रहे इन हमलों ने स्थानीय हिंदू आबादी के मन में गहरा खौफ पैदा कर दिया है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को एक और हिंदू युवक की नृशंस हत्या की खबर सामने आई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
5 जनवरी 2026 की रात बांग्लादेश के नरसिंग्दी जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई। नरसिंग्दी के पोलाश उपजिला स्थित चोर्सिंदूर बाज़ार में रात करीब 10 बजे एक हिंदू दुकानदार, मोनी चक्रवर्ती पर अज्ञात हमलावरों ने घात लगाकर हमला किया। हमलावरों ने धारदार हथियारों का इस्तेमाल कर मोनी को लहूलुहान कर दिया। मदन चक्रवर्ती के सबसे बड़े बेटे मोनी ने चोटों के कारण मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह हत्या राणा प्रताप बैरागी की मौत के महज कुछ ही घंटों के भीतर हुई, जो राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था का प्रमाण है।
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ लक्षित हिंसा की यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले 21 दिनों के भीतर छह हिंदू युवकों की हत्या की जा चुकी है। इससे पहले दीपू चंद्र दास नामक फैक्ट्री कर्मचारी को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। वहीं, अमृत मंडल और बजेंद्र बिस्वास की भी संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई। मयमनसिंह जिले में बजेंद्र को उसके ही साथी गार्ड ने गोली मार दी थी, जबकि कारोबारी खोकन दास ने भीड़ के हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद अस्पताल में दम तोड़ा था। राणा प्रताप और मोनी चक्रवर्ती की मौत इसी खूनी कड़ी का हिस्सा है।
हत्याओं के साथ-साथ महिलाओं के विरुद्ध यौन हिंसा की घटनाओं ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। झेनैदाह जिले के कालिगंज से एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ एक 40 वर्षीय हिंदू विधवा के साथ कट्टरपंथियों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। बदमाशों ने महिला के रिश्तेदारों को एक कमरे में बंद कर दिया और महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया। हैवानियत यहीं नहीं रुकी; बलात्कार के बाद आरोपियों ने महिला को पेड़ से बांधकर उसकी पिटाई की और उसके बाल काट डाले।
इस घृणित अपराध को अंजाम देने वाले आरोपियों, जिनमें शाहीन और उसका एक साथी शामिल है, ने पूरी घटना का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया। स्थानीय लोगों की मदद से बेहोश महिला को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। पीड़िता ने साहस दिखाते हुए आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक न केवल जीवन के अधिकार से वंचित हो रहे हैं, बल्कि उनकी गरिमा को भी सरेआम तार-तार किया जा रहा है।
लगातार हो रही इन वारदातों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और वहां की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अपराधियों को मिल रहा राजनीतिक संरक्षण और न्याय में देरी इन घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। यदि समय रहते इन हमलों को नहीं रोका गया, तो यह न केवल बांग्लादेश के सामाजिक ताने-बाने को नष्ट कर देगा, बल्कि क्षेत्र में एक बड़े मानवीय संकट को भी जन्म दे सकता है।
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