Bangladesh Pak JF-17 Deal
Bangladesh Pakistan JF-17 Deal: दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला उलटफेर देखने को मिल रहा है। साल 1971 के खूनी संघर्ष और पाकिस्तान के दमनकारी इतिहास को दरकिनार करते हुए, बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार अब इस्लामाबाद के साथ अपने रिश्तों को नए आयाम दे रही है। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार का झुकाव स्पष्ट रूप से पाकिस्तान की ओर बढ़ा है। इस दोस्ती का सबसे ताज़ा और विवादास्पद उदाहरण रक्षा क्षेत्र में सामने आया है, जहाँ बांग्लादेश अब पाकिस्तान से अत्याधुनिक लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है। यह कदम न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट का भी संकेत है।
हाल ही में बांग्लादेश एयर फ़ोर्स (BAF) के चीफ, एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान ने पाकिस्तान का एक महत्वपूर्ण दौरा किया। पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग, ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ (ISPR) द्वारा जारी एक विस्तृत बयान के अनुसार, हसन महमूद ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के एयर चीफ मार्शल ज़हीर अहमद बाबर के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना और सैन्य साजो-सामान की खरीद-बिक्री पर सहमति बनाना था। इस दौरे ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है क्योंकि यह बांग्लादेश की विदेश नीति में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।
पाकिस्तान और चीन के संयुक्त उपक्रम से बना ‘JF-17 थंडर’ फाइटर जेट इस समय चर्चा का केंद्र है। रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेशी वायुसेना प्रमुख ने इस 4.5 जेनरेशन के लड़ाकू विमान को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। वर्तमान में बांग्लादेश की वायुसेना पुराने हो चुके F-7 और MiG-29 विमानों पर निर्भर है, जिनका रखरखाव अब चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। JF-17 थंडर चीनी एवियोनिक्स और लंबी दूरी के हथियारों से लैस एक आधुनिक विमान है। यदि यह सौदा परवान चढ़ता है, तो यह पहला मौका होगा जब बांग्लादेश अपनी सुरक्षा के लिए पाकिस्तान जैसे देश पर निर्भर होगा, जिससे वह कभी अलग हुआ था।
शेख हसीना के भारत में शरण लेने के बाद से ढाका और दिल्ली के बीच ‘कोल्ड वॉर’ जैसी स्थिति बनी हुई है। हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले, सीमा पर घुसपैठ और राजनीतिक बयानबाजी ने दोनों देशों के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है। जहाँ एक ओर भारत के साथ कूटनीतिक रिश्तों में कांटे बिछाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुहम्मद यूनुस की सरकार इस्लामाबाद की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस स्थिति का लाभ उठाकर बांग्लादेश में अपनी पैठ फिर से जमाना चाहता है। रक्षा क्षेत्र में यह नया गठबंधन भारत की रणनीतिक सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकता है।
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से भारत विरोधी भावनाओं और कट्टरपंथ में अचानक उछाल देखा गया है। पाकिस्तान के साथ सैन्य गठबंधन बनाने की इस पहल को इसी विचारधारा के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। 1971 के नरसंहार के जख्मों को भुलाकर पाकिस्तान से हथियार खरीदना यह दर्शाता है कि ढाका अब अपनी पुरानी ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति को त्याग कर एक नया ‘पाकिस्तान-चीन’ एक्सेस बनाने की राह पर है। यह बदलाव न केवल द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करेगा, बल्कि बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को भी पूरी तरह से बदल सकता है।
दिल्ली के लिए यह समय अत्यंत सतर्क रहने का है। बांग्लादेश द्वारा पाकिस्तानी फाइटर जेट खरीदने का निर्णय केवल एक सैन्य सौदा नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। यदि ढाका अपनी सैन्य जरूरतों के लिए पाकिस्तान और चीन पर निर्भरता बढ़ाता है, तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका सीधा असर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि भारत अपनी कूटनीति के जरिए इस बिगड़ते संतुलन को कैसे संभालता है और क्या बांग्लादेश अपने ऐतिहासिक गौरव को पुनः याद करेगा या पाकिस्तान के प्रभाव में आकर दिल्ली से अपनी ‘दुश्मनी’ और गहरी करेगा।
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