India-Bangladesh Row
India-Bangladesh Row: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की हालिया टिप्पणियों ने भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब कर अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज कराई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश के महानिदेशक (दक्षिण एशिया) इशरत जहां ने भारतीय राजनयिक से मुलाकात की और स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सरमा के बयान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए अपमानजनक हैं। ढाका ने इन बयानों को अनावश्यक और उकसाने वाला बताते हुए भारत सरकार के समक्ष अपना विरोध प्रकट किया है।
विवाद की शुरुआत असम के मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए एक इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। 15 अप्रैल को एक साक्षात्कार के दौरान सरमा ने कहा था कि वह प्रार्थना करते हैं कि बांग्लादेश में स्थिति वैसी ही बनी रहे जैसी यूनुस के समय थी, और संबंधों में अधिक सुधार की गुंजाइश न रहे। इसके बाद, 26 अप्रैल को उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि “बदतमीज लोग नरम भाषा नहीं समझते।” उन्होंने अवैध घुसपैठियों को वापस भेजने की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कड़ा रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि बीएसएफ कई बार संदिग्ध घुसपैठियों को हिरासत में रखती है और मौका मिलने पर उन्हें सीमा पार धकेल दिया जाता है।
हिमंत बिस्वा सरमा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और बांग्लादेश अपने संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी गिरावट देखी गई थी। हालांकि, हाल के महीनों में उच्च स्तरीय वार्ताओं के जरिए तनाव कम करने के प्रयास किए गए। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की हालिया भारत यात्रा और एस जयशंकर के साथ उनकी मुलाकात को इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा था। ऐसे में मुख्यमंत्री के बयान को कूटनीतिक प्रयासों के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
इस तनाव के बीच भारत सरकार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में नया भारतीय उच्चायुक्त नियुक्त करने की घोषणा की है। त्रिवेदी जल्द ही प्रणय वर्मा का स्थान लेंगे। वर्तमान उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद संबंधों को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब दिनेश त्रिवेदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती न केवल सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के मुद्दों को सुलझाना होगा, बल्कि राजनीतिक बयानों से उपजी कड़वाहट को कम कर विश्वास बहाली करना भी होगा।
असम के मुख्यमंत्री द्वारा घुसपैठियों को “वापस धकेलने” के दावे ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (BGB) के बीच के प्रोटोकॉल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सरमा के बयानों ने यह संकेत दिया है कि सीमा पर स्थिति काफी तनावपूर्ण है। जहां असम सरकार घुसपैठ को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर अडिग है, वहीं बांग्लादेश इसे अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के खिलाफ और अपमानजनक मान रहा है। यह मुद्दा आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत का मुख्य केंद्र बना रह सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ (Neighborhood First) नीति के तहत बांग्लादेश एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में क्षेत्रीय राजनीति और घरेलू मुद्दों को लेकर दिए गए बयानों का अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा असर पड़ता है। ढाका में भारतीय कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब किए जाना इस बात का संकेत है कि बांग्लादेश अब भारतीय नेताओं के बयानों पर बारीकी से नजर रख रहा है। अब सबकी निगाहें नई दिल्ली की आधिकारिक प्रतिक्रिया और नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की कार्ययोजना पर टिकी हैं।
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