Bangladesh Violence:
Bangladesh Violence: भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता एक बार फिर गहराती जा रही है। देश के कई हिस्सों में तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं और राजनीतिक दलों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। आवामी लीग ने अंतरिम यूनुस सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिसके चलते ढाका समेत विभिन्न शहरों में हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आई हैं। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जुड़ा एक अहम फैसला आज अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) में आने वाला है। तख्तापलट के बाद हसीना देश से बाहर हैं, लेकिन उनके खिलाफ कानूनी मामलों की सुनवाई जारी है। इस फैसले का देश की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है, इसी कारण से पूरे बांग्लादेश में तनाव और आशंका का माहौल बना हुआ है। आवामी लीग इस फैसले को लेकर विशेष रूप से सतर्क है और उसने पहले ही व्यापक आंदोलन की तैयारी कर रखी है।
देर रात आवामी लीग समर्थकों ने राजधानी ढाका में कई बसों को आग के हवाले कर दिया। इसके साथ ही सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संपत्ति को भी निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में कई स्थानों पर धुआँ उठता देखा गया, जबकि स्थानीय लोगों ने बताया कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार झड़पें हो रही हैं। विभिन्न जिलों में भी सड़कें जाम कर दी गईं, दुकानें बंद कराई गईं और व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गए।
यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सुरक्षा बलों को आवश्यक होने पर गोली चलाने के भी निर्देश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि देश में शांति और व्यवस्था बनाए रखना पहली प्राथमिकता है और किसी भी तरह की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके मद्देनज़र ढाका, चिटगाँग, खुलना और अन्य प्रमुख शहरों में सीमा रक्षकों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश शुरू कर दी है।
शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग ने अदालत के फैसले से पहले सरकार पर दबाव बनाने के लिए देशभर में ‘पूर्ण बंद’ का ऐलान किया है। हालांकि यूनुस सरकार ने पहले ही आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया था, इस कारण पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। बंद के आह्वान के बाद तनाव और बढ़ गया है, और राजधानी ढाका में सभी संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं।
लगातार बढ़ते राजनीतिक संघर्षों और हिंसा की घटनाओं के कारण आम जनता में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। स्कूल, कॉलेज और बाज़ारों में लोगों की आवाजाही कम दिखाई दे रही है। कई जगहों पर इंटरनेट सेवाओं पर भी सीमित प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शेख हसीना पर आने वाला फैसला विवादित रहा, तो देश में और बड़ा राजनीतिक संकट उत्पन्न हो सकता है।
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