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Bangladesh Violence 2025: 27 साल में पहली बार थमी प्रथम आलो की छपाई, उस्मान हादी मर्डर के बाद ढाका में आगजनी

Bangladesh Violence 2025 : बांग्लादेश की राजधानी ढाका एक बार फिर हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता की आग में जल उठी है। छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की संदिग्ध मौत ने पूरे देश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है, जिसका सबसे खौफनाक रूप मीडिया संस्थानों पर हमले के रूप में सामने आया। उग्र प्रदर्शनकारियों ने देश के दो सबसे प्रतिष्ठित अखबारों, ‘प्रथम आलो’ (Prothom Alo) और ‘द डेली स्टार’ (The Daily Star) के दफ्तरों को निशाना बनाया और उनमें आग लगा दी। यह घटना बांग्लादेशी मीडिया के इतिहास में अभिव्यक्ति की आजादी पर सबसे बड़े हमलों में से एक मानी जा रही है।

Bangladesh Violence 2025: आधी रात का तांडव: पत्रकारों को जान बचाकर भागना पड़ा

गवाहों और चश्मदीदों के अनुसार, सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी आधी रात के करीब मीडिया हाउस के बाहर जमा हुए और उग्र नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते भीड़ हिंसक हो गई और कार्यालयों में घुसकर तोड़फोड़ शुरू कर दी। ‘प्रथम आलो’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर सज्जाद शरीफ ने इस भयावह अनुभव को साझा करते हुए इसे ‘सबसे काली रात’ करार दिया। उन्होंने बताया कि उस समय पत्रकार अगले दिन के संस्करण के लिए काम कर रहे थे, लेकिन जान का खतरा देखते हुए सभी को काम छोड़कर भागना पड़ा। हमलावरों ने न केवल फर्नीचर बल्कि तकनीकी उपकरणों को भी भारी नुकसान पहुँचाया।

Bangladesh Violence 2025: 27 साल का रिकॉर्ड टूटा: पहली बार नहीं छपा ‘प्रथम आलो’

इस हमले का असर इतना गंभीर रहा कि 1998 में अपनी स्थापना के बाद पहली बार ‘प्रथम आलो’ का प्रिंट संस्करण प्रकाशित नहीं हो सका। संपादक सज्जाद शरीफ ने भावुक होते हुए कहा कि पिछले 27 वर्षों में कई कठिन परिस्थितियां आईं, लेकिन अखबार का प्रकाशन कभी नहीं रुका। हमले के कारण संस्थान की वेबसाइट भी ठप हो गई है। संपादक ने अंतरिम सरकार से अपील की है कि मीडिया पर यह हमला लोकतंत्र की हत्या के समान है और इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

शरीफ उस्मान हादी की हत्या: वह चिंगारी जिसने आग लगाई

हिंसा की मुख्य वजह 32 वर्षीय छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत है। हादी को 12 दिसंबर को ढाका के मोतिझील इलाके में उस समय सिर में गोली मारी गई थी, जब वे एक रिक्शा पर सवार होकर अपने चुनावी अभियान की तैयारी कर रहे थे। नकाबपोश हमलावरों ने उनके कान के पास गोली मारी, जिससे वे कोमा में चले गए थे। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहाँ छह दिनों के संघर्ष के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मौत की खबर फैलते ही उनके समर्थक और छात्र सड़कों पर उतर आए और मीडिया हाउसों को निशाना बनाया।

‘जुलाई आंदोलन’ के नायक: नई पीढ़ी की मुखर आवाज थे हादी

शरीफ उस्मान हादी केवल एक छात्र नेता नहीं थे, बल्कि वे पिछले साल हुए प्रसिद्ध ‘जुलाई आंदोलन’ के प्रमुख चेहरों में से एक थे। वे ‘इंक़िलाब मंच’ के संयोजक थे और देश की पारंपरिक राजनीति के कड़े आलोचक माने जाते थे। ढाका विश्वविद्यालय से शिक्षित हादी ने न केवल अवामी लीग बल्कि अन्य मुख्यधारा के दलों के राजनीतिक वर्चस्व को भी चुनौती दी थी। उनकी मौत ने उन युवाओं को आक्रोशित कर दिया है जो उन्हें भविष्य के नेतृत्व के रूप में देख रहे थे।

राजनीतिक अस्थिरता और चुनाव की चुनौती

हादी की हत्या और उसके बाद मीडिया पर हुए हमलों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। यह अशांति ऐसे समय में आई है जब देश राष्ट्रीय चुनावों की तैयारी कर रहा है और भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को फिर से संतुलित करने की कोशिश में है। अंतरिम मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने हादी की मौत की पुष्टि करते हुए शांति की अपील की है, लेकिन ढाका सहित कई प्रमुख शहरों में तनाव बरकरार है। पुलिस फिलहाल हमलावरों की पहचान करने में जुटी है, लेकिन अभी तक हत्या के पीछे की साजिश का खुलासा नहीं हो सका है।

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