Bangladesh Violence
Bangladesh Violence 2025: बांग्लादेश में लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए पिछला हफ्ता किसी काले अध्याय से कम नहीं रहा। ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता और छात्र नेता उस्मान हादी की निर्मम हत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। 12 दिसंबर को ढाका के बिजयनगर इलाके में जब हादी रिक्शा से यात्रा कर रहे थे, तब उन्हें बेहद करीब से सिर में गोली मार दी गई। गंभीर हालत में उन्हें सिंगापुर ले जाया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद 18 दिसंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया। इस मौत के बाद ढाका की सड़कों पर हिंसक प्रदर्शनों का सैलाब उमड़ पड़ा, मीडिया संस्थानों को निशाना बनाया गया और कई इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया। फिलहाल ढाका में एक ‘असहज शांति’ बनी हुई है।
इस भीषण हिंसा और अस्थिरता के बीच, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने न्यूज़ एजेंसी ANI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की कड़ी आलोचना की है। हसीना ने आरोप लगाया कि जिस “अराजकता” के दम पर उनकी सरकार को सत्ता से बेदखल किया गया था, वह यूनुस के कार्यकाल में अब कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंतरिम सरकार देश में बुनियादी व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश की विश्वसनीयता पर पड़ रहा है।
शेख हसीना ने बांग्लादेश में बढ़ते इस्लामवादी प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि मोहम्मद यूनुस के पास एक जटिल राष्ट्र को चलाने का कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है। हसीना ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि यूनुस ने कैबिनेट पदों पर चरमपंथियों को बैठाया है और जेलों से सजायाफ्ता आतंकवादियों को रिहा कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि कट्टरपंथी समूह यूनुस को एक ‘उदार चेहरे’ के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि पर्दे के पीछे वे देश की संस्थाओं को व्यवस्थित रूप से कट्टरपंथी बना रहे हैं। यह स्थिति केवल बांग्लादेश के लिए नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने देश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि भारत और अन्य पड़ोसी देश इस अराजकता को बड़ी चिंता के साथ देख रहे हैं। शेख हसीना के अनुसार, हिंसा और अस्थिरता न केवल बांग्लादेश को आंतरिक रूप से खोखला करती है, बल्कि पड़ोसियों के साथ उन द्विपक्षीय संबंधों को भी अस्थिर करती है जिन्हें बनाने में दशकों लगे हैं। उन्होंने कहा, “भारत हमारे द्वारा मिलकर बनाई गई हर चीज का क्षरण देख रहा है।” उनके मुताबिक, जब कोई देश अपनी सीमाओं के भीतर व्यवस्था नहीं रख सकता, तो उसकी अंतरराष्ट्रीय साख गिरना निश्चित है।
शेख हसीना ने अपने इंटरव्यू के अंत में बांग्लादेश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की सबसे बड़ी ताकत उसकी धर्मनिरपेक्ष सरकार थी, जिसे अब “कुछ मूर्ख चरमपंथियों” की इच्छा के कारण दांव पर लगा दिया गया है। छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या को उन्होंने इसी अराजकता का एक प्रतिबिंब बताया। उनका डर है कि अगर वर्तमान अंतरिम सरकार ने कट्टरपंथियों पर लगाम नहीं लगाई, तो बांग्लादेश वापस उस दौर में चला जाएगा जहाँ से निकलना नामुमकिन होगा।
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