Baramati Bypoll 2026
Baramati Bypoll 2026 : महाराष्ट्र की सियासत का केंद्र माने जाने वाले बारामती में विधानसभा उपचुनाव को लेकर हलचलें अपने चरम पर पहुंच गई हैं। सोमवार, 6 अप्रैल 2026 को उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता सुनेत्रा पवार ने आधिकारिक तौर पर अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इस मौके पर सत्ताधारी गठबंधन की एकजुटता देखने को मिली, जहां एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल के साथ-साथ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी मौजूद रहे। दूसरी ओर, विपक्षी खेमे से कांग्रेस ने अपने प्रदेश सचिव आकाश मोरे को सुनेत्रा पवार के खिलाफ मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है। बारामती की जनता के लिए यह चुनाव भावनात्मक और राजनीतिक, दोनों ही दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
एनसीपी (SP) प्रमुख शरद पवार ने कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को अपना प्रत्याशी खड़ा करने का संवैधानिक अधिकार है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हालांकि, इस दौरान शरद पवार भावुक भी नजर आए। उन्होंने अपने भतीजे और दिवंगत नेता अजित पवार के योगदान को याद करते हुए उनके कार्यों की सराहना की। शरद पवार ने अजित पवार के निधन को अपनी व्यक्तिगत क्षति बताया और कहा कि उन्होंने बारामती के विकास के लिए जो किया, उसे भुलाया नहीं जा सकता। चाचा-भतीजे के बीच पिछले कुछ वर्षों में आए राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, दुख की इस घड़ी में शरद पवार का यह बयान क्षेत्र के मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
उसी दिन दिल्ली में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ, जहां शरद पवार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। स्वास्थ्य कारणों और बढ़ती उम्र की चुनौतियों के चलते उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर शपथ ली। महाविकास आघाड़ी (MVA) द्वारा उम्मीदवार बनाए गए शरद पवार ने इस अवसर पर अपने लंबे राजनीतिक जीवन को याद किया। उन्होंने कहा, “सार्वजनिक जीवन में यह मेरा 14वां कार्यकाल है, जो मेरे 65 वर्षों के समर्पण का प्रतीक है।” उन्होंने इसे एक ‘सुनहरा अवसर’ बताते हुए संकेत दिया कि वे अभी भी सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और दोनों गुटों (अजित पवार बनाम शरद पवार गुट) के संभावित विलय को लेकर भी शरद पवार ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने स्वीकार किया कि विलय को लेकर पहले जयंत पाटिल के माध्यम से बातचीत की जा रही थी, लेकिन फिलहाल भविष्य को लेकर स्थिति अनिश्चित है। पवार के इस बयान से साफ है कि संगठन के भीतर अभी भी कई तकनीकी और वैचारिक पेंच फंसे हुए हैं, जिन्हें सुलझाना आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती होगी।
नामांकन दाखिल करने के बाद सुनेत्रा पवार ने बारामती की जनता से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि यह उपचुनाव एक ऐसी त्रासदी का परिणाम है जिसकी कल्पना किसी ने सपने में भी नहीं की थी। सुनेत्रा ने अजित पवार को याद करते हुए कहा, “बारामती का कोना-कोना अजित दादा के विकास कार्यों की गवाही देता है। अपने व्यक्तिगत दुख को किनारे रखकर मैंने जनता की सेवा और उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए मैदान में उतरने का फैसला किया है।”
बता दें कि बारामती की यह विधानसभा सीट इसी साल 28 जनवरी को हुए एक दुखद विमान हादसे के बाद खाली हुई थी। उस हादसे में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की जान चली गई थी। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, इस सीट पर 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि चुनावी नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी। यह उपचुनाव न केवल बारामती के भविष्य का फैसला करेगा, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन के नए समीकरण भी तय करेगा।
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