Baramati Bypoll
Baramati Bypoll: महाराष्ट्र की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में से एक, बारामती के उपचुनाव में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि वह इस उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश इकाई को उम्मीदवार का नाम वापस लेने के निर्देश दे दिए गए हैं। इस निर्णय के बाद अब महायुति गठबंधन की उम्मीदवार सुनेत्रा पवार की राह पूरी तरह निष्काटक नजर आ रही है। राजनीतिक गलियारों में इस कदम को विपक्षी एकजुटता या रणनीतिक पीछे हटने के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस के आंतरिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने शुरुआत में आकाश मोरे को बारामती विधानसभा उपचुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया था और उन्होंने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया था। हालांकि, आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद अब यह तय हो गया है कि गुरुवार दोपहर तीन बजे की समय सीमा से पहले आकाश मोरे अपना नामांकन पत्र वापस ले लेंगे। नामांकन वापसी की यह प्रक्रिया पूरी होते ही सुनेत्रा पवार के निर्विरोध विधायक चुने जाने का औपचारिक रास्ता साफ हो जाएगा, जो कि क्षेत्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक घटना होगी।
वर्तमान में महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की साझा सरकार (महायुति) चल रही है। सीटों के बंटवारे के तहत बारामती विधानसभा क्षेत्र एनसीपी (अजित पवार गुट) के खाते में आया था। यह सीट राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे दिवंगत नेता की विरासत से जुड़ी है, जिनके आकस्मिक निधन के बाद यह रिक्त हुई थी। इसी रिक्त स्थान को भरने और राजनीतिक निरंतरता बनाए रखने के लिए सुनेत्रा पवार ने पहले ही उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है, और अब उनका विधायक बनना मात्र एक औपचारिकता रह गया है।
सुनेत्रा पवार के लिए यह उपचुनाव महज एक जीत नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक कद की पुष्टि है। डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने के बाद उनके लिए विधानसभा की सदस्यता अनिवार्य थी। कांग्रेस के इस फैसले ने न केवल उन्हें कड़े चुनावी मुकाबले से बचा लिया है, बल्कि सत्ता पक्ष के आत्मविश्वास को भी बढ़ाया है। विपक्षी दल के मैदान छोड़ने से अब क्षेत्र में चुनाव प्रचार का शोर थम जाएगा और प्रशासन भी निर्विरोध निर्वाचन की तैयारी शुरू कर देगा। बारामती की जनता अब अपनी नई जन-प्रतिनिधि के रूप में सुनेत्रा पवार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार कर रही है।
कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार हटाने के इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनावों में सीधे टकराव से बचने के लिए विपक्षी गठबंधन ने यह समझौता किया होगा। हालांकि, बारामती जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर बिना लड़े हार मान लेना कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए एक चौंकाने वाला संदेश है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस ‘वॉकओवर’ का असर आगामी पूर्ण विधानसभा चुनावों और स्थानीय गठबंधन के समीकरणों पर क्या पड़ता है। फिलहाल, बारामती में भगवा और घड़ी के गठबंधन का परचम लहराता दिख रहा है।
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