Bastar Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग मुख्यालय, जगदलपुर में नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों को एक बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। राज्य में माओवाद विरोधी अभियानों के बढ़ते दबाव और शासन की पुनर्वास नीतियों से प्रभावित होकर ओडिशा के चार बड़े इनामी नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग त्यागने का निर्णय लिया है। यह आत्मसमर्पण न केवल सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है, बल्कि नक्सली संगठन के भीतर टूटती कमान और घटते प्रभाव का भी स्पष्ट संकेत है। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में एक पुरुष और तीन महिला कैडर शामिल हैं, जो लंबे समय से सक्रिय थे।
40 लाख की इनामी महिला कैडर नीतू ने डाले हथियार
इस आत्मसमर्पण की सबसे बड़ी खबर वरिष्ठ महिला माओवादी कैडर ‘नीतू’ का आत्मसमर्पण है। नीतू पर शासन द्वारा 40 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित किया गया था। वह एसजेडसी (Special Zonal Committee) स्तर की सदस्य है, जो नक्सली संगठन में एक अत्यंत प्रभावशाली और रणनीतिक पद माना जाता है। नीतू के साथ आए तीन अन्य नक्सलियों पर कुल मिलाकर 15 लाख रुपये का इनाम था, जिससे इस पूरे समूह पर घोषित कुल इनामी राशि 55 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। इतनी बड़ी इनामी राशि वाले नक्सलियों का एक साथ मुख्यधारा में लौटना बस्तर और ओडिशा सीमावर्ती क्षेत्रों में माओवादी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका है।
दिवंगत माओवादी कमांडर गणेश उइके की टीम से था संबंध
प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले ये सभी माओवादी ओडिशा के कंधमाल जिले में सक्रिय थे। ये सभी हाल ही में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए दुर्दांत माओवादी नेता और सेंट्रल कमेटी सदस्य (CCM) गणेश उइके की टीम का हिस्सा थे। गणेश उइके की मृत्यु के बाद से ही इस दस्ते में नेतृत्व का अभाव और असुरक्षा की भावना घर कर गई थी। उइके की टीम से जुड़े इन प्रमुख चेहरों के हटने से कंधमाल और आसपास के क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों के संचालन में संगठन को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
सुरक्षा बलों का दबाव और बदलती विचारधारा
नक्सलियों के इस हृदय परिवर्तन के पीछे सुरक्षा एजेंसियों की निरंतर कार्रवाई और जंगलों में बढ़ते दबाव को मुख्य कारण माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा की पुलिस के साथ-साथ सीआरपीएफ (CRPF) के साझा अभियानों ने नक्सलियों के रसद और सूचना तंत्र को कमजोर कर दिया है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार की ‘लोन वर्राटू’ (घर वापस आइये) जैसी पुनर्वास योजनाओं ने भी माओवादियों को यह अहसास कराया है कि हिंसा के रास्ते पर चलने से बेहतर सम्मानजनक जीवन जीना है। आत्मसमर्पण करने वाले इन चारों नक्सलियों ने फिलहाल जगदलपुर में सीआरपीएफ के अधिकारियों के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
आधिकारिक पुष्टि और भविष्य की प्रक्रिया
यद्यपि ये चारों माओवादी जगदलपुर पहुंच चुके हैं, लेकिन वर्तमान में सुरक्षा एजेंसियां उनसे गहन पूछताछ कर रही हैं। नक्सलियों के आत्मसमर्पण की आधिकारिक पुष्टि और औपचारिक घोषणा कुछ ही समय में किए जाने की संभावना है। औपचारिक कार्यक्रम के बाद ही इन सभी माओवादियों के विस्तृत नाम, उनके द्वारा किए गए अपराधों का विवरण, संगठन में उनके सटीक पद और उन पर घोषित व्यक्तिगत इनामी राशि की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। प्रशासन अब इनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करेगा ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
















