Bastar Pandum
Bastar Pandum: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान जगदलपुर पहुंचीं, जहाँ उन्होंने ऐतिहासिक लालबाग मैदान में ‘बस्तर पंडुम’ महोत्सव का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने भावुक स्वर में कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर आना उन्हें हमेशा अपने घर आने जैसा सुखद अनुभव देता है। उन्होंने बस्तर की विरासत की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहाँ की संस्कृति न केवल अत्यंत प्राचीन है, बल्कि विश्व की सबसे मधुर संस्कृतियों में से एक है। राष्ट्रपति के अनुसार, बस्तर के लोग ‘पडुंम’ को केवल एक कार्यक्रम की तरह नहीं, बल्कि एक जीवंत उत्सव के रूप में जीते हैं, जो यहाँ की विशिष्ट पहचान है।
समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने बस्तर की नैसर्गिक सुंदरता और अद्वितीय जनजातीय कलाओं का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यहाँ की कला और परंपराएं दुनियाभर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर की प्रसिद्ध ढोकरा आर्ट से निर्मित ‘कर्मा वृक्ष’ और कोसा सिल्क से तैयार पारंपरिक गमछा भेंट कर सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने वहाँ लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया, जहाँ उन्होंने पारंपरिक हस्तशिल्प, जनजातीय वेशभूषा और स्थानीय उत्पादों की बारीकियों को समझा। उन्होंने स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों से संवाद कर उनके कौशल की सराहना की और उनके साथ स्मृति के रूप में समूह चित्र भी खिंचवाए।
नक्सलवाद के गंभीर मुद्दे पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि पिछले चार दशकों से इस समस्या के कारण बस्तर के आदिवासी समाज ने काफी क्षति झेली है। हालांकि, उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि अब बस्तर तेजी से नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो रहा है। उन्होंने सुरक्षा बलों और प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में नक्सली अब हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उन्होंने भटके हुए युवाओं से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और विकास की प्रक्रिया का हिस्सा बनें। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति और संवाद ही बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का एकमात्र मार्ग है।
महोत्सव के दौरान बस्तर की विभिन्न जनजातियों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर आदिवासी नर्तकों ने लोकगीतों और नृत्यों की ऐसी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं कि पूरा वातावरण बस्तरिया रंग में रंग गया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने अपनी रीति-रिवाजों की झलक दिखाकर अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बस्तर की लुप्त होती परंपराओं को सहेजना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। राष्ट्रपति ने इन प्रस्तुतियों को बस्तर की अटूट जिजीविषा का प्रतीक बताया।
राष्ट्रपति के प्रवास के साथ ही प्रदेश में राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी हलचलें भी तेज हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शनिवार शाम करीब 7 बजे रायपुर पहुंचेंगे। रात्रि 8 बजे वे वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। शाह का यह दौरा सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रविवार को वे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा स्थिति और विकास कार्यों की गहन समीक्षा करेंगे। इसके अतिरिक्त, गृहमंत्री 9 फरवरी को बस्तर पंडुम महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे, जो इस महोत्सव के महत्व को और बढ़ाता है।
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