Bastar vision 2028
Bastar vision 2028: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के विकास में दशकों से बाधा बना नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में है। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और हमारे सुरक्षाबलों के साहस के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति वापस लौट रही है। शासन की प्राथमिकता अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हिंसा की विचारधारा दोबारा जड़ें न जमा सके। इसके लिए बस्तर के लोगों के साथ निरंतर संवाद और विश्वास बहाली के कार्यों को तेज किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने ‘डबल इंजन’ सरकार के विजन को साझा करते हुए कहा कि बस्तर का सर्वांगीण और संतुलित विकास केंद्र और राज्य दोनों की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बस्तर को विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ने के लिए अगले तीन वर्षों का एक व्यापक ‘एक्शन प्लान’ तैयार किया गया है। इसे मिशन मोड में लागू किया जाएगा ताकि कोई भी क्षेत्र पीछे न छूटे। मुख्यमंत्री ने सभी विभागीय सचिवों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे केवल फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि बस्तर के दूरस्थ इलाकों का दौरा कर जमीनी स्तर पर योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करें।
नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को सबसे मजबूत हथियार माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बैठक में निर्देश दिए कि बिजली, सड़क, पेयजल और संचार जैसी सुविधाओं का विस्तार युद्ध स्तर पर किया जाए। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में स्थानीय लोगों के भारी उत्साह का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बस्तर की जनता अब विकास और शांति के पथ पर आगे बढ़ने के लिए आतुर है। शासन और प्रशासन के प्रति जनता का भरोसा तभी मजबूत होगा जब विकास की रोशनी बस्तर के अंतिम छोर तक पहुंचेगी।
बैठक में पेयजल और कनेक्टिविटी पर गहन चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने के लिए सतही जल स्रोतों के उपयोग पर जोर दिया। इसके साथ ही, बचे हुए गांवों के शीघ्र विद्युतीकरण और मोबाइल टावरों की स्थापना में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। आधार कार्ड निर्माण के लिए विशेष अभियान चलाने और बच्चों के शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने की बात भी कही गई। स्वास्थ्य के क्षेत्र में ‘पीएम-अभीम’ योजना, मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और दुर्गम क्षेत्रों के लिए ‘बाइक एम्बुलेंस’ सेवा को सुदृढ़ करने पर चर्चा की गई।
बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता को आर्थिक शक्ति बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘बस्तर टूरिज्म कॉरिडोर’ के निर्माण और ‘होम-स्टे’ को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने आईआईटीटीएम ग्वालियर से प्रशिक्षित 32 स्थानीय गाइडों की पहल की सराहना की, जो बस्तर के पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाएंगे। इसके अतिरिक्त, लघु वनोपज के प्रसंस्करण के लिए ‘वनधन केंद्रों’ को मजबूत करने, सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने और ग्रामीण बस सेवा के माध्यम से आवागमन को सुगम बनाने की योजना पर भी विस्तृत समीक्षा की गई।
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