Bee Venom: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने खेल जगत और आम जनता को स्तब्ध कर दिया है. शुक्लागंज के सप्रू ग्राउंड में आयोजित केडीएमए (KDMA) लीग मैच के दौरान अचानक मधुमक्खियों के एक विशाल झुंड ने हमला बोल दिया. इस हमले की चपेट में आने से एक अंपायर की दुखद मृत्यु हो गई. सामान्यतः लोग सांप के काटने को सबसे अधिक जानलेवा मानते हैं, लेकिन यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में नन्हीं सी दिखने वाली मधुमक्खी भी उतनी ही घातक साबित हो सकती है. मेडिकल साइंस के अनुसार, मधुमक्खी का डंक कुछ लोगों के लिए मौत का कारण बन सकता है.

एनाफिलेक्सिस: जब एक डंक ही बन जाता है काल
ज्यादातर लोगों के लिए मधुमक्खी का काटना केवल कुछ समय का दर्द, सूजन और त्वचा पर लालिमा का कारण बनता है. हालांकि, जिन व्यक्तियों को मधुमक्खी के जहर से एलर्जी होती है, उनके लिए स्थिति बिल्कुल अलग होती है. ऐसे लोगों में ‘एनाफिलेक्सिस’ (Anaphylaxis) नाम का एक गंभीर रिएक्शन होता है. यह एक तीव्र इम्यून रिस्पांस है, जिसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र जहर के प्रति जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाता है. इस दौरान गला तेजी से सूज सकता है, जिससे वायु मार्ग अवरुद्ध हो जाता है और सांस लेना असंभव हो जाता है. साथ ही, ब्लड प्रेशर अचानक गिर जाता है, जिससे व्यक्ति मिनटों में बेहोश होकर जान गंवा सकता है.
झुंड का हमला: जब शरीर में जहर की मात्रा टॉक्सिक लेवल पार कर जाए
मधुमक्खी के डंक के खतरनाक होने की दूसरी स्थिति तब पैदा होती है जब हमला झुंड में किया जाए. प्रत्येक मधुमक्खी शरीर में ‘एपिटॉक्सिन’ (Apitoxin) नाम का जहर छोड़ती है. जब सैकड़ों मधुमक्खियां एक साथ वार करती हैं, तो शरीर में जहर की कुल मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है. शोध बताते हैं कि एक स्वस्थ वयस्क के लिए 1000 से अधिक डंक जानलेवा हो सकते हैं, वहीं बच्चों के लिए केवल 500 डंक ही प्राणघातक साबित हो सकते हैं. रक्तप्रवाह में इतना अधिक जहर पहुंचने से मांसपेशियां टूटने लगती हैं (Rhabdomyolysis), किडनी फेल हो सकती है और शरीर के महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर देते हैं.
सांप का जहर बनाम मधुमक्खी का जहर: कौन है अधिक शक्तिशाली?
तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो सांप का जहर मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र (Nervous System) या रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया पर सीधा हमला करता है. सांप का जहर अपनी रासायनिक तीव्रता की वजह से खतरनाक है. इसके विपरीत, मधुमक्खी का जहर दो तरह से जान लेता है: पहला, शरीर की अति-संवेदनशीलता (एलर्जी) के कारण और दूसरा, जहर की अत्यधिक मात्रा (झुंड के हमले) के कारण. सांप के मामले में जहर की एक बूंद काफी है, जबकि मधुमक्खी के मामले में शरीर का उस पर होने वाला ‘हाइपर-रिएक्शन’ सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है.
मेडिकल इमरजेंसी के लक्षण: इन संकेतों को कभी न करें नजरअंदाज
मधुमक्खी के हमले के बाद यदि किसी व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो उसे बिना देरी किए अस्पताल ले जाना चाहिए:
सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई या घरघराहट होना.
चेहरे, होठों या गले में तेजी से सूजन आना.
ब्लड प्रेशर कम होना और चक्कर आना या बेहोशी छाना.
लगातार उल्टी होना या पेट में तेज ऐंठन होना.
सीने में जकड़न या तेज दर्द महसूस होना. समय पर मेडिकल सहायता, जैसे ‘एपिनेफ्रिन’ का इंजेक्शन, मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है.

















