Belarus President:
Belarus President: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक पटल पर भारत की धाक लगातार बढ़ रही है। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने हाल ही में भारत को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने भारत को दुनिया के उभरते हुए ‘शक्ति केंद्र’ के रूप में स्वीकार किया है। लुकाशेंको का यह बयान न केवल भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाता है, बल्कि पश्चिमी देशों के उन दावों को भी झुठलाता है जो भारत की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठा रहे थे।
राष्ट्रपति लुकाशेंको ने अपने हालिया संबोधन में दुनिया की वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में चीन, रूस और अमेरिका दुनिया के तीन प्रमुख शक्ति केंद्र हैं। हालांकि उन्होंने यूरोपीय संघ को चौथे संभावित केंद्र के रूप में देखा, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि आंतरिक कलह के कारण यूरोप कमजोर पड़ सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने भारत का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब दुनिया के लिए आकर्षण का एक नया केंद्र बन रहा है, जिसकी अनदेखी करना अब किसी भी महाशक्ति के लिए संभव नहीं है।
लुकाशेंको की यह टिप्पणी ऐसे संवेदनशील समय में आई है जब भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में तनाव देखा जा रहा है। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद दोनों देशों के संबंध चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। बेलारूसी राष्ट्रपति का यह बयान नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विवादास्पद बयान को भी कड़ा जवाब माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने भारत और रूस को ‘डेड इकोनॉमी’ (मृत अर्थव्यवस्था) कहकर संबोधित किया था। लुकाशेंको ने साफ कर दिया कि दुनिया की नजर में भारत की असलियत ट्रंप के दावों के बिल्कुल विपरीत है।
सच्चाई यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.6% कर दिया है, जबकि कई घरेलू वित्तीय संस्थानों का मानना है कि यह 7% के आंकड़े को भी पार कर सकती है। यह विकास डिजिटल नवाचार, बड़े पैमाने पर विनिर्माण (Manufacturing) और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत द्वारा उठाए गए क्रांतिकारी कदमों का परिणाम है।
भारत की इस सफलता की रीढ़ यहाँ के युवा उद्यमी और स्टार्टअप्स हैं। नई दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर आज वैश्विक तकनीक के केंद्र बन चुके हैं, जहाँ हजारों इंजीनियर एआई (AI) और फिनटेक जैसे आधुनिक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों ने भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में काम किया है। इसके अलावा, रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि और सफल अंतरिक्ष मिशनों ने भारत की वैश्विक स्थिति को और अधिक सशक्त किया है।
भू-राजनीतिक स्तर पर भारत की ‘तटस्थता’ और ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आवाज बनना उसे अन्य देशों से अलग करता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय विवादों में हमेशा संवाद और कूटनीति का पक्ष लिया है, जिससे वैश्विक व्यवस्था में उसका सम्मान बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विकास की यही गति बनी रही, तो भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह प्रगति केवल कागजी आंकड़े नहीं हैं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन स्तर में सुधार और उनकी सफलता की एक जीवंत कहानी है।
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