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Beldanga violence: कलकत्ता हाई कोर्ट का सख्त आदेश, तैनात होंगी सेंट्रल फोर्स, NIA जांच संभव

Beldanga violence: मुर्शिदाबाद में तनाव और न्यायपालिका का हस्तक्षेप पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा और तनाव ने पूरे राज्य को चिंता में डाल दिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ ने बेलडांगा में शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों (Central Forces) की तत्काल तैनाती का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की जान-माल और उनकी आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

कोर्ट का निर्देश: सेंट्रल फोर्स की तैनाती और राज्य को सलाह

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मुर्शिदाबाद में पहले से ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 5 कंपनियां मौजूद हैं। चीफ जस्टिस ने निर्देश दिया कि इन बलों का उपयोग केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से हिंसा पर काबू पाने और गश्त बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी सुझाव दिया कि यदि मौजूदा बल पर्याप्त नहीं हैं, तो केंद्र सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मंजूरी लेने में देरी न की जाए।

गंभीर आरोप: हिंसा सुनियोजित थी और पुलिस मूकदर्शक रही

वादी के वकीलों ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि बेलडांगा में हुई हिंसा कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उपद्रवियों ने रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया, पत्रकारों की पिटाई की और नेशनल हाईवे को घंटों तक बाधित रखा। सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया कि वहां सेंट्रल फोर्स की मौजूदगी के बावजूद प्रशासन ने उनका समय पर इस्तेमाल नहीं किया। पुलिस अधीक्षक (SP) के बयानों का हवाला देते हुए वकील ने कहा कि जब हंगामा पहले से तय था, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए?

NIA जांच की संभावना: विदेशी फंडिंग का संदेह

इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब वादी ने घटना की एनआईए (NIA) जांच की मांग की। याचिकाकर्ता का दावा है कि बंगाल की शांति भंग करने के लिए विदेशों से फंडिंग की जा रही है, जिसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। इस पर अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि यदि केंद्र सरकार को लगता है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और इसकी एनआईए जांच आवश्यक है, तो उन्हें जांच शुरू करने की पूरी आजादी होगी। कोर्ट ने इस पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है।

राज्य सरकार का पक्ष: गिरफ्तारियां और स्थिति नियंत्रण में

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कोर्ट को बताया कि प्रशासन ने हिंसा रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सभी आवश्यक कदम उठाए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि शुक्रवार को हुई घटना के बाद अब तक 31 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और पुलिस थानों में चार अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। राज्य का दावा है कि बेलडांगा में अब स्थिति सामान्य है, बाजार खुल गए हैं और सुरक्षा बल सक्रिय रूप से पेट्रोलिंग कर रहे हैं।

सुरक्षा और सेक्शन 163 (धारा 144) का मुद्दा

सुनवाई के दौरान बेलडांगा में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (जिसे पहले धारा 144 के रूप में जाना जाता था) लागू करने की मांग भी की गई। वादी का कहना था कि अशांति को पूरी तरह खत्म करने के लिए सख्त कानूनी घेरेबंदी जरूरी है। अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट (DM) और एसपी को आदेश दिया है कि वे केवल कागजी कार्रवाई न करें, बल्कि धरातल पर सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कड़े एक्शन लें।

शांति बहाली की चुनौती कलकत्ता हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब गेंद केंद्र और राज्य सरकार के पाले में है। जहां एक ओर सुरक्षा बलों की मुस्तैदी बढ़ाई गई है, वहीं एनआईए जांच की तलवार भी लटक रही है। मुर्शिदाबाद के नागरिकों के लिए प्राथमिकता केवल सुरक्षा है, और कोर्ट का यह आदेश उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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