Bengal Election
Bengal Election : पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र के महापर्व के दौरान निष्पक्षता से समझौता करने वाले पुलिस अधिकारियों पर चुनाव आयोग ने कड़ा प्रहार किया है। 23 अप्रैल को संपन्न हुए पहले चरण के मतदान के दौरान अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही और राजनीतिक पक्षपात के आरोपी पाए गए पांच पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबित अधिकारियों में एक आईपीएस (IPS) अधिकारी सहित एसडीपीओ और कई थानों के प्रभारी शामिल हैं। चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों के बाद अब इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान के दौरान राज्य के कई हिस्सों से छिटपुट हिंसा और झड़पों की खबरें सामने आई थीं। विशेष रूप से डायमंड हार्बर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई दिखी। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवारों पर जानलेवा हमले हुए और एक प्रत्याशी को तो सरेआम दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। इन घटनाओं ने चुनाव आयोग की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद आयोग ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका की गहन जांच के आदेश दिए थे।
चुनाव आयोग ने अपनी जांच में पाया कि डायमंड हार्बर क्षेत्र के कुछ आला अधिकारी मतदान के दिन निष्पक्षता बरतने में पूरी तरह विफल रहे। साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने निम्नलिखित अधिकारियों के निलंबन का आदेश दिया:
संदीप गरई: आईपीएस, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP), डायमंड हार्बर।
सजल मंडल: एसडीपीओ (SDPO), डायमंड हार्बर।
मौसम चक्रवर्ती: प्रभारी निरीक्षक, डायमंड हार्बर पुलिस स्टेशन।
अजय बाग: प्रभारी निरीक्षक, फाल्टा पुलिस स्टेशन।
सुभेच्छा बाग: प्रभारी अधिकारी, उस्ती पुलिस स्टेशन।
इन अधिकारियों पर न केवल लापरवाही, बल्कि गंभीर दुर्व्यवहार और एक पक्ष विशेष की मदद करने के संगीन आरोप लगे हैं।
पुलिस अधिकारियों के निलंबन के साथ-साथ चुनाव आयोग ने जिले के शीर्ष नेतृत्व पर भी उंगली उठाई है। डायमंड हार्बर की पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. ईशानी पाल को आयोग ने कड़ी चेतावनी जारी की है। आयोग ने अपनी टिप्पणी में कहा कि डॉ. पाल चुनाव जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समय में अपने अधीनस्थ अधिकारियों के बीच अनुशासन सुनिश्चित करने और मतदान की निष्पक्षता बनाए रखने में विफल रहीं। यह चेतावनी भविष्य के चरणों के लिए अन्य जिला प्रमुखों के लिए भी एक कड़ा संदेश है।
निलंबन की इस सूची में सबसे प्रमुख नाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप गरई का है। सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ कदाचार और पक्षपात के पुख्ता सबूत मिले हैं। चुनाव आयोग अब उनके विरुद्ध मिली शिकायतों और सबूतों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने की तैयारी में है। चूंकि आईपीएस अधिकारी केंद्र सरकार के अधीन होते हैं, इसलिए उनके खिलाफ आगामी कार्रवाई और भी सख्त हो सकती है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया को दूषित करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास पुराना रहा है, लेकिन इस बार चुनाव आयोग ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है। अधिकारियों के निलंबन की इस कार्रवाई से साफ है कि आयोग किसी भी स्तर पर प्रशासनिक मिलीभगत को बर्दाश्त नहीं करेगा। पहले चरण की गलतियों से सबक लेते हुए, आयोग ने अगले चरणों के लिए सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया है। पुलिस मुख्यालय को निर्देश दिए गए हैं कि केवल उन्हीं अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी पर तैनात किया जाए जिनकी छवि निष्पक्ष और ईमानदार रही है। इस कार्रवाई ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
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