Bengal Politics: पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्धमान जिले में सोमवार को उस समय भारी तनाव व्याप्त हो गया, जब कालना उपखंड शासक (एसडीओ) कार्यालय के सामने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। विवाद की मुख्य वजह मतदाता सूची से नाम हटाने से जुड़ा ‘फॉर्म 7’ जमा करने की प्रक्रिया बनी। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस धक्का-मुक्की और हिंसक टकराव में तब्दील हो गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए कालना थाना की भारी पुलिस फोर्स को मौके पर तैनात किया गया, जिन्होंने काफी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित किया।
नारेबाजी और जूतों का प्रदर्शन: बढ़ा सांप्रदायिक और राजनीतिक तनाव
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब भाजपा कार्यकर्ता फॉर्म 7 जमा करने के लिए एसडीओ कार्यालय की ओर कूच कर रहे थे, तभी तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने ‘जय बांग्ला’ के नारों के साथ उनका रास्ता रोक दिया। इस दौरान माहौल तब और खराब हो गया जब दोनों पक्षों के बीच जूतों और झाड़ू का प्रदर्शन किया गया। एक ओर से ‘जय बांग्ला’ तो दूसरी ओर से ‘जय श्रीराम’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग स्थानों पर बैरिकेडिंग कर रोक दिया, जिससे कार्यालय परिसर छावनी में तब्दील हो गया।
भाजपा का आरोप: पुलिस और टीएमसी की मिलीभगत से रोका गया काम
घटना के बाद भाजपा नेतृत्व ने स्थानीय प्रशासन और सत्तारूढ़ दल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं का दावा है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से फॉर्म जमा करने जा रहे थे, लेकिन तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उन्हें शारीरिक रूप से बाधित किया। भाजपा ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि सुरक्षा बल केवल उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे थे, जबकि टीएमसी समर्थकों को खुली छूट दी गई। भाजपा नेताओं ने कहा कि पुलिस और टीएमसी मिलकर विपक्ष की आवाज दबाने और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश कर रहे हैं।
टीएमसी का पलटवार: “वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश बर्दाश्त नहीं”
वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया। टीएमसी का दावा है कि भाजपा ‘फॉर्म 7’ का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से कटवाने की कोशिश कर रही है। INTTUC के जिला अध्यक्ष संदीप बसु ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि यदि पुलिस नहीं होती, तो वे और भी उग्र प्रदर्शन करते। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा के किसी भी ऐसे कदम का डटकर विरोध किया जाएगा जो आम जनता के मताधिकार को प्रभावित करता हो।
क्या है फॉर्म नंबर-7? चुनाव आयोग के कड़े नियम
इस पूरे विवाद के केंद्र में ‘फॉर्म नंबर-7’ है। भारतीय चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, वोटर लिस्ट से किसी भी मतदाता का नाम हटवाने के लिए इस फॉर्म को भरना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पूरी की जा सकती है। हालांकि, आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति दुर्भावनापूर्ण तरीके से या झूठे आधार पर किसी का नाम कटवाने का आवेदन करता है, तो आरपी एक्ट-1950 की धारा 31 के तहत उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसमें एक साल तक की जेल या जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है।
















