Bengal Voter List
Bengal Voter List: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में प्रकाशित की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (Electoral Roll) ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने और सुधारने की प्रक्रिया के बीच ऐसी गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जिन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं जीवित व्यक्तियों को सरकारी दस्तावेजों में ‘मृत’ घोषित कर दिया गया है, तो कहीं प्रतिष्ठित नेताओं के परिजनों के नाम और सरनेम में बड़ी गड़बड़ियां मिली हैं।
पूर्व बर्दमान जिले के कालना से एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ के निवासी पूर्ण साहा को चुनाव आयोग की ड्राफ्ट लिस्ट में मृत करार दे दिया गया है। 42 वर्षीय पूर्ण साहा, जो पूरी तरह स्वस्थ और जीवित हैं, तब दंग रह गए जब उन्होंने मतदाता सूची में अपने नाम के आगे ‘मृत’ शब्द लिखा देखा। यह खबर फैलते ही इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया और चुनाव आयोग की डेटा एंट्री प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर उंगलियां उठने लगीं।
प्रशासनिक लापरवाही से क्षुब्ध होकर पूर्ण साहा ने विरोध का एक अनोखा तरीका अपनाया। बुधवार दोपहर वह सीधे कालना नगर पालिका कार्यालय पहुँच गए। वहाँ उन्होंने अधिकारियों से कहा, “चूंकि चुनाव आयोग ने अपनी लिस्ट में मुझे मार दिया है, इसलिए अब मुझे मेरा मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) दे दीजिए।” उनकी इस मांग ने वहां मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों को हैरत में डाल दिया। साहा का तर्क था कि यदि सरकारी रिकॉर्ड उन्हें मृत मान चुका है, तो उन्हें जीवित रहने का प्रमाण देने के बजाय प्रशासन को अब मौत का सर्टिफिकेट दे देना चाहिए।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का यह सिलसिला केवल आम जनता तक सीमित नहीं है। माकपा (CPI-M) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम के बेटे आतिश अजीज के मामले में भी बड़ी त्रुटि सामने आई है। आरोप है कि ड्राफ्ट लिस्ट में उनका सरनेम ‘अजीज’ से बदलकर ‘अवस्थी’ कर दिया गया है। आतिश ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए सवाल किया कि यदि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों के डेटा के साथ ऐसी गड़बड़ी हो सकती है, तो सामान्य नागरिकों का क्या हाल होता होगा?
पूर्ण साहा के मामले में लापरवाही की परतें तब खुलीं जब पता चला कि उन्होंने 16 नवंबर को ही अपना नंबर 16 फॉर्म (Enumeration Form) भरकर बीएलओ (BLO) को जमा किया था। उनके पास इसकी रसीद भी मौजूद है। पूर्ण साहा की पत्नी ने आरोप लगाया कि बीएलओ उनके घर नहीं आया था, बल्कि पड़ोस के घर से ही फॉर्म लिए गए थे। जब लिस्ट जारी हुई, तो न केवल नाम के आगे मृत लिखा था, बल्कि फॉर्म के डिजिटल डेटा में भी उन्हें मृत ही दर्शाया गया था।
इस पूरे विवाद के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया है। कालना के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए BLO और AERO से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन यह जानने की कोशिश कर रहा है कि फॉर्म जमा होने के बावजूद यह मानवीय त्रुटि थी या तकनीकी खामी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी और मतदाता सूची में आवश्यक सुधार तत्काल प्रभाव से किए जाएंगे।
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