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अंबिकापुर @thetarget365 सुप्रीम कोर्ट के द्वारा आरक्षण में वर्गीकरण एवं क्रीमीलेयर निर्णय को लेकर भारत बंद (Bharat Bandh) का सरगुजा जिले में मिला-जुला असर देखने को मिला। शहर में कुछ प्रतिष्ठान बंद रहे वहीं छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के द्वारा नगर में घूमकर दुकानों को बंद करवाने का प्रयास किया गया। पूरे प्रदेश में इस भारत बंद का असर मिलाजुला रहा। कई संघों ने इस बंद के आह्वान को अपना समर्थन देने से इनकार कर दिया था।
अंबिकापुर शहर में सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में एकजुट हो आदिवासियों ने बंद के समर्थन में कलेक्ट्रेट चौक से रैली निकली। जगह जगह घूमकर दुकानों-प्रतिष्ठानों को बंद कराने आह्वान किया जाने लगा। भारत बंद के मद्देनजर सुबह से पुलिस बल भारी संख्या में चौक-चौराहों पर तैनात थी। किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने रैली के साथ-साथ पुलिस बल भी घूम रहा है। सरगुजा जिले के कुछ हिस्सों में भारत बंद के आह्वान पर विरोध प्रदर्शन करते देखा गया। सभी स्कूल कॉलेज इस दौरान खुले रहे। आंदोलन में शामिल आदिवासी समाज के प्रमुख ने कहा कि आदिवासी जितने भी नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री हैं। इन्हीं की बदौलत संसद में यह पास हुआ है और हम उनसे अनुरोध करते हैं। इस निर्णय को वापस लिया जाए। ऐसे नहीं तो भारत सरकार आदिवासियों को मरवाना चाहती है। यही वजह है कि आरक्षण खत्म करने की बात सामने आ रही है।
दरअसल देश में एसटी-एससी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वर्गीकरण एवं क्रीमी लेयर निर्णय को अनुसूचित जनजाति के लोगों ने असवैधानिक बताया है। साथ ही इसका विरोध प्रदर्शन पूरे देशभर में लगातार किया जा रहा है। उसी के मद्देनजर आज 21 अगस्त को भारत बंद का आह्वान किया गया था।
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