Bharatmala Project: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारत माला परियोजना मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे निलंबित SDM निर्भय साहू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने आरोपी को 30 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। गौरतलब है कि निर्भय साहू की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से पहले ही खारिज हो चुकी थी और उनके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी था। गिरफ्तारी से ठीक एक दिन पहले, 16 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनकी 23.35 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच कर इस मामले में कानूनी घेरा और कड़ा कर दिया है।

साजिश का तरीका: बैकडेट एंट्री और जमीन का फर्जी बंटवारा
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि निर्भय साहू ने अभनपुर तहसील में पदस्थापना के दौरान अपने अधीनस्थों (पटवारी और राजस्व निरीक्षकों) के साथ मिलकर एक सिंडिकेट बनाया था। इस सिंडिकेट ने ग्राम नायकबांधा, उरला और भेलवाडीह जैसे प्रभावित गांवों की भूमि को ‘बैकडेट’ में छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर दिया। राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर जमीन के 159 नए खसरे बनाए गए और मुआवजे की सूची में 80 नए नाम जोड़ दिए गए। इस फर्जीवाड़े के जरिए जिस जमीन का मुआवजा 29.5 करोड़ रुपए होना चाहिए था, उसे बढ़ाकर 70 करोड़ रुपए से अधिक कर दिया गया।
ED की एंट्री: मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक खातों का मायाजाल
प्रवर्तन निदेशालय की रायपुर जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से इस घोटाले की जांच शुरू की है। जांच में पाया गया कि जमीन दलालों और सरकारी अधिकारियों ने मिलकर गरीब जमीन मालिकों के नाम पर कई बैंक खाते खुलवाए। मुआवजे की भारी-भरकम राशि इन खातों में जमा कराई गई, जिसे बाद में हस्ताक्षरित चेक के जरिए मुख्य आरोपियों के खातों में ट्रांसफर कर लिया गया। वास्तविक जमीन मालिकों को केवल नाममात्र का हिस्सा दिया गया, जबकि करोड़ों रुपए का गबन सिंडिकेट ने आपस में बांट लिया। अब तक इस मामले में 27.05 करोड़ रुपए के गबन की पुष्टि हो चुकी है।
भू-माफिया और अधिकारियों का सिंडिकेट: तहसीलदार से लेकर दलाल तक शामिल
इस घोटाले का मुख्य चेहरा जमीन दलाल हरमीत सिंह खनूजा है। जांच के दौरान पारिवारिक रिश्तों और पद के दुरुपयोग की कड़ियाँ भी सामने आई हैं। हरमीत खनूजा ने तहसीलदार रविंदर कौर से शादी की थी, जिससे उसे राजस्व रिकॉर्ड तक आसान पहुँच मिली। ईडी की छानबीन में खनूजा के ससुर हरमीत सिंह चावला के पास से भी महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और पैसे के लेनदेन के दस्तावेज मिले हैं। इस सिंडिकेट ने न केवल मुआवजे की राशि बढ़ाई, बल्कि पहले से अधिग्रहित भूमि को दोबारा अधिग्रहण दिखाकर शासन को दोहरी चपत लगाई।
भारत माला परियोजना: राष्ट्र निर्माण की योजना में भ्रष्टाचार का सेंध
भारत माला परियोजना केंद्र सरकार की एक अति-महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य देश भर में 26 हजार किलोमीटर लंबे आर्थिक कॉरिडोर विकसित करना है। रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर इसी का हिस्सा है। इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना में हुए 43 करोड़ के इस घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस मामले में अब तक कोरबा के पूर्व डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और निर्भय साहू सहित पांच अधिकारियों पर गाज गिर चुकी है। फिलहाल 78 करोड़ रुपए के संदिग्ध भुगतान को रोक दिया गया है और जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
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