Bhilai Steel Plant: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसका सरगना कोई साधारण अपराधी नहीं बल्कि एक पढ़ा-लिखा मैकेनिकल इंजीनियर है। आरोपी ई. पापा राव, जिसने भोपाल से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी, भिलाई स्टील प्लांट (BSP) की पार्किंग से बाइक चोरी करने के सिलसिलेवार मामलों में मुख्य आरोपी पाया गया है। ताज्जुब की बात यह है कि आरोपी पहले इसी प्लांट में संविदा कर्मचारी के रूप में काम कर चुका था, जिसके कारण उसे प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था और पार्किंग के रास्तों की पूरी जानकारी थी।
चोरी का अनोखा तरीका: रायपुर से बस में आकर करता था वारदात
आरोपी की कार्यशैली किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं थी। वह वर्तमान में रायपुर के चंगोरा भाठा इलाके में रह रहा था। चोरी की वारदात को अंजाम देने के लिए वह रायपुर से बस में सवार होकर भिलाई आता और पावर हाउस चौक पर उतर जाता था। वहां से वह पैदल चलकर बीएसपी के मेन गेट स्थित पार्किंग तक पहुँचता था। उसके पास एक ‘मास्टर चाबी’ थी, जिसका उपयोग कर वह मिनटों में बाइक अनलॉक कर देता था। पूछताछ में पता चला कि उसका सबसे आसान टारगेट ‘होंडा शाइन’ मॉडल की बाइक होती थी, जिसे उसकी चाबी आसानी से खोल लेती थी।
लंगड़ाती चाल ने पहुंचाया सलाखों के पीछे: CCTV से मिला सुराग
इस पूरे गिरोह को पकड़ने में 7 नवंबर 2025 को हुई एक चोरी की घटना निर्णायक साबित हुई। जब पुलिस ने घटना स्थल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले, तो उन्हें एक संदिग्ध व्यक्ति लंगड़ाते हुए चलता दिखाई दिया। पुलिस ने जब जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि मुख्य आरोपी ई. पापा राव के पैर में एक पुरानी दुर्घटना की वजह से लोहे की रॉड लगी हुई है, जिससे वह सामान्य रूप से नहीं चल पाता। उसकी यही विशिष्ट चाल पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग बनी और इसी के आधार पर पुलिस ने उसे रायपुर से दबोच लिया।
जशपुर के कुनकुरी में बिकती थी गाड़ियां: मैकेनिक साथी भी गिरफ्तार
ई. पापा राव बाइक चोरी करने के बाद उन्हें जशपुर जिले के कुनकुरी ले जाता था। वहां उसके दो साथी, मनोज राम और राम सेवक प्रजापति उर्फ रवि, गाड़ियों को ठिकाने लगाने का काम करते थे। ये दोनों पेशे से मैकेनिक हैं, जो चोरी की गाड़ियों की पहचान बदलकर उन्हें ग्रामीण इलाकों में बेच देते थे। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर कुनकुरी से 11 बाइक बरामद की हैं और दोनों सहयोगियों को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, 1 जनवरी से 14 दिसंबर 2025 के बीच कुल 31 बाइक चोरी की गईं, जिनकी कुल कीमत लगभग 31 लाख रुपए है।
पार्किंग सुरक्षा पर उठे सवाल: कहाँ-कहाँ से हुई चोरियां?
पुलिस ने इस गिरोह के पास से कुल 31 बाइक बरामद की हैं। जांच में सामने आया कि चोरियों का सबसे बड़ा केंद्र बीएसपी का मेन गेट था, जहाँ से 19 बाइक गायब हुई थीं। इसके अलावा बोरिया गेट से 4, गणेश पंडालों से 2 और सेक्टर-1 गार्डन से भी 2 बाइक चोरी की गई थीं। प्लांट के भीतर बिलेट यार्ड और आईआर विभाग के गेट के बाहर से भी गाड़ियां पार की गई थीं। भिलाई-भट्टी थाने में ही अकेले 23 मामले दर्ज थे। इस खुलासे के बाद अब औद्योगिक क्षेत्रों की पार्किंग सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
















