Bhiwandi Mayor Election: महाराष्ट्र की राजनीति में स्थानीय निकाय चुनावों के बाद समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ताजा मामला भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका का है, जहां मेयर चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को एक जबरदस्त रणनीतिक झटका लगा है। बीजेपी के निर्वाचित 22 पार्षदों में से 9 पार्षदों ने बगावत करते हुए अपना एक अलग गुट बना लिया है। इस गुट ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इस चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद अब महानगरपालिका में कांग्रेस पार्टी के लिए अपना मेयर और डिप्टी मेयर चुनने की राह पूरी तरह साफ होती दिख रही है।

भिवंडी सेक्युलर फ्रंट (BSF) का गठन और नया समीकरण
कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बुधवार, 18 फरवरी को मीडिया से बातचीत में इस नए गठबंधन की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि बीजेपी से अलग हुए 9 पार्षदों ने मिलकर ‘भिवंडी सेक्युलर फ्रंट’ (BSF) का गठन किया है। इस नए फ्रंट के समर्थन के बाद कांग्रेस-एनसीपी (शरद पवार गुट) गठबंधन ने 90 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए आवश्यक 46 सीटों का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। इस उलटफेर ने बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के मंसूबों पर पानी फेर दिया है, जो यहां सत्ता पर काबिज होने की जुगत में थे।
सत्ता पक्ष में दरार और विपक्ष की मजबूती
कांग्रेस के पदाधिकारियों का दावा है कि बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच आंतरिक मतभेदों के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। पिछले महीने संपन्न हुए नगर निगम चुनावों में कांग्रेस 30 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत से काफी दूर थी। इस बीच, समाजवादी पार्टी ने शिवसेना (शिंदे गुट) को समर्थन देने का संकेत दिया था, जिससे मुकाबला रोचक हो गया था। हालांकि, बीजेपी के भीतर हुई इस बड़ी सेंधमारी ने अब सत्ता का पलड़ा कांग्रेस की ओर झुका दिया है।
चुनाव परिणाम और सीटों का गणित
महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के लिए 15 जनवरी 2026 को मतदान हुआ था, जिसके नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए थे। भिवंडी-निजामपुर के नतीजों ने किसी एक दल को स्पष्ट जनादेश नहीं दिया था, जिससे गठबंधन की राजनीति अनिवार्य हो गई थी। 90 सदस्यीय इस निकाय में पार्टियों की स्थिति कुछ इस प्रकार रही:
| पार्टी | सीटें |
| कांग्रेस | 30 |
| बीजेपी | 22 |
| शिवसेना (एकनाथ शिंदे) | 12 |
| एनसीपी (शरद पवार गुट) | 12 |
| समाजवादी पार्टी | 06 |
| कोनार्क विकास अघाड़ी | 04 |
| भिवंडी विकास अघाड़ी | 03 |
| निर्दलीय | 01 |
मेयर चुनाव पर सबकी नजरें
इस नई सियासी घेराबंदी के बाद अब भिवंडी में मेयर पद के लिए होने वाला चुनाव महज एक औपचारिकता नजर आ रहा है। कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) का गठबंधन निर्दलीय और नए बने ‘भिवंडी सेक्युलर फ्रंट’ के साथ मिलकर शासन करने को तैयार है। वहीं, बीजेपी के लिए अपने कुनबे को बचाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। जानकारों का मानना है कि यदि यह गठबंधन टिक जाता है, तो अगले पांच सालों तक भिवंडी की कमान कांग्रेस के हाथों में रहेगी।
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