Bhupesh Baghel GST: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने हाल ही में केंद्र सरकार की नई GST दरों पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “वन नेशन, वन टैक्स” की जो परिकल्पना 2017 में पेश की गई थी, वह अब तक ज़मीन पर पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है।
GST के 8 साल: वादों और हकीकत में फासला?
30 जून 2017 की रात देश ने “वन नेशन, वन टैक्स” के नाम पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) को अपनाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे कर सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया था। लेकिन भूपेश बघेल का कहना है कि अब 8 साल बीतने के बाद भी न तो टैक्स प्रणाली पारदर्शी हो पाई है और न ही समान रूप से लागू।
उनके अनुसार, “आपने कहा था कि 5 स्लैब होंगे, लेकिन अब उन्हें घटाकर 2 कर दिया है। इससे व्यापारियों को और उपभोक्ताओं को क्या वास्तविक लाभ मिल रहा है, यह स्पष्ट नहीं है। उल्टा इससे कर जटिलता और असमंजस और बढ़ा है।”
नई GST दरें: किसे फायदा, किसे नुकसान?
हाल ही में GST काउंसिल द्वारा कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर नई दरें लागू की गई हैं। सरकार का दावा है कि इससे कर प्रणाली और सरल होगी और छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी। लेकिन विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह बदलाव सिर्फ कागज़ों पर है, ज़मीनी हकीकत इससे अलग है।
भूपेश बघेल ने कहा, “यदि वास्तव में ‘वन नेशन, वन टैक्स’ लागू हुआ होता, तो देश भर के व्यापारियों और उपभोक्ताओं को एक समान लाभ मिलता। अभी भी राज्यों में टैक्स कलेक्शन और रिफंड में भारी अंतर देखने को मिल रहा है।”
राज्यों की भूमिका और केंद्र का नियंत्रण
उन्होंने कहा GST लागू होने के बाद राज्यों को टैक्स लगाने के अधिकारों में कटौती हुई है। बघेल ने इस मुद्दे पर भी चिंता जताई और कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्यों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप कर रही है। “GST से राज्यों की आर्थिक स्वतंत्रता प्रभावित हुई है और केंद्र इस पर पूरा नियंत्रण बनाए रखना चाहता है”
GST जैसी कर व्यवस्था की सफलता इसके समान और पारदर्शी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। विपक्ष द्वारा उठाए गए सवाल यह दर्शाते हैं कि अभी भी इसमें सुधार की आवश्यकता है। “वन नेशन, वन टैक्स” का सपना तभी साकार होगा जब देश के हर हिस्से में एक समान दरें और प्रक्रिया लागू हों, और आम नागरिक को इसका सीधा लाभ मिले।
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Bhupesh Baghel GST: GST नई दरों पर भूपेश बघेल का हमला, ‘वन नेशन, वन टैक्स’ का वादा पूरा नहीं हुआ
Bhupesh Baghel GST: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने हाल ही में केंद्र सरकार की नई GST दरों पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “वन नेशन, वन टैक्स” की जो परिकल्पना 2017 में पेश की गई थी, वह अब तक ज़मीन पर पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है।
GST के 8 साल: वादों और हकीकत में फासला?
30 जून 2017 की रात देश ने “वन नेशन, वन टैक्स” के नाम पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) को अपनाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे कर सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया था। लेकिन भूपेश बघेल का कहना है कि अब 8 साल बीतने के बाद भी न तो टैक्स प्रणाली पारदर्शी हो पाई है और न ही समान रूप से लागू।
उनके अनुसार, “आपने कहा था कि 5 स्लैब होंगे, लेकिन अब उन्हें घटाकर 2 कर दिया है। इससे व्यापारियों को और उपभोक्ताओं को क्या वास्तविक लाभ मिल रहा है, यह स्पष्ट नहीं है। उल्टा इससे कर जटिलता और असमंजस और बढ़ा है।”
नई GST दरें: किसे फायदा, किसे नुकसान?
हाल ही में GST काउंसिल द्वारा कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर नई दरें लागू की गई हैं। सरकार का दावा है कि इससे कर प्रणाली और सरल होगी और छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी। लेकिन विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह बदलाव सिर्फ कागज़ों पर है, ज़मीनी हकीकत इससे अलग है।
भूपेश बघेल ने कहा, “यदि वास्तव में ‘वन नेशन, वन टैक्स’ लागू हुआ होता, तो देश भर के व्यापारियों और उपभोक्ताओं को एक समान लाभ मिलता। अभी भी राज्यों में टैक्स कलेक्शन और रिफंड में भारी अंतर देखने को मिल रहा है।”
राज्यों की भूमिका और केंद्र का नियंत्रण
उन्होंने कहा GST लागू होने के बाद राज्यों को टैक्स लगाने के अधिकारों में कटौती हुई है। बघेल ने इस मुद्दे पर भी चिंता जताई और कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्यों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप कर रही है। “GST से राज्यों की आर्थिक स्वतंत्रता प्रभावित हुई है और केंद्र इस पर पूरा नियंत्रण बनाए रखना चाहता है”
GST जैसी कर व्यवस्था की सफलता इसके समान और पारदर्शी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। विपक्ष द्वारा उठाए गए सवाल यह दर्शाते हैं कि अभी भी इसमें सुधार की आवश्यकता है। “वन नेशन, वन टैक्स” का सपना तभी साकार होगा जब देश के हर हिस्से में एक समान दरें और प्रक्रिया लागू हों, और आम नागरिक को इसका सीधा लाभ मिले।
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