Baghel Budget Reactio
Baghel Budget Reaction : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर कड़ा प्रहार किया है। बघेल ने इस बजट को न केवल निराशाजनक बल्कि ‘प्रतिगामी’ (Regressive) करार दिया। उनका मानना है कि सरकार ने आंकड़ों की बाजीगरी तो की है, लेकिन देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने या उसे नई मजबूती देने के लिए कोई ठोस रोडमैप पेश नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट आम आदमी की जेब काटने वाला और विकास की गति को रोकने वाला दस्तावेज है।
भूपेश बघेल ने मध्यम वर्ग की व्यथा को उठाते हुए कहा कि नौकरीपेशा लोग लंबे समय से इनकम टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव और राहत की उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने कहा, “मध्यम वर्ग इस देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन इस बजट में उनके लिए कुछ भी नहीं है।” टैक्स स्लैब में बदलाव न किए जाने को उन्होंने जनता के साथ विश्वासघात बताया। उनके अनुसार, बढ़ती महंगाई के दौर में मध्यम वर्ग को टैक्स में छूट न देना उनके घरेलू बजट को और अधिक बिगाड़ने का काम करेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बजट के तकनीकी और सामाजिक पहलुओं का विश्लेषण करते हुए कहा कि कृषि, उद्योग, रोजगार और शिक्षा जैसे चार स्तंभों को इस बजट में पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करने वाली सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कोई क्रांतिकारी प्रावधान नहीं किया। साथ ही, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने के बजाय पुराने दावों को ही दोहराया गया है। मजदूरों और किसानों को इस बजट से जो राहत मिलनी चाहिए थी, वह कहीं दिखाई नहीं देती।
केंद्र सरकार पर व्यंग्य करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि इस बजट की प्राथमिकताएं बहुत अजीब हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “बजट का सार यह है कि शराब महंगी कर दी गई है और मछली सस्ती, लेकिन देश का विकास कैसे होगा, इस पर सरकार मौन है।” उन्होंने कहा कि बुनियादी सुविधाओं और विकास के बजाय सरकार केवल सतही बदलावों में उलझी हुई है, जिससे न तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुधरेगी और न ही शहरी क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान होगा।
बघेल ने बजट के आर्थिक प्रभाव पर चर्चा करते हुए शेयर बाजार का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि बजट पेश होते ही शेयर मार्केट का धड़ाम से गिरना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि निवेशकों और बाजार के दिग्गजों को सरकार की नीतियों पर कोई भरोसा नहीं रहा। उनके अनुसार, जब बाजार किसी बजट को नकारात्मक रूप से लेता है, तो इसका सीधा अर्थ है कि आने वाले समय में निवेश घटेगा और आर्थिक विकास की दर सुस्त होगी।
अंत में भूपेश बघेल ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का एक मायाजाल है, जिसमें देश की वास्तविक समस्याओं जैसे बेरोजगारी और महंगाई का कोई समाधान नहीं ढूंढा गया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह केवल कागजी घोषणाओं के बजाय जमीनी स्तर पर राहत देने वाली नीतियों पर ध्यान केंद्रित करे। उनके अनुसार, यह बजट देश को आगे ले जाने के बजाय पीछे की ओर धकेलने वाला साबित होगा।
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