Jan Suraaj Supreme Court
Jan Suraaj Supreme Court : चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज’ ने बिहार विधानसभा चुनाव की शुचिता को लेकर एक बड़ा कानूनी मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने बिहार में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध प्रक्रियाओं का पालन किया गया और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग हुआ। जन सुराज पार्टी ने इन अनियमितताओं के आधार पर बिहार में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।
जन सुराज पार्टी की याचिका का मुख्य आधार बिहार सरकार द्वारा चुनाव के दौरान महिलाओं के बैंक खातों में सीधे 10,000 रुपये हस्तांतरित करना है। याचिका में दावा किया गया है कि जब राज्य में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू थी, उस समय लाखों महिला मतदाताओं को इस प्रकार की नकद राशि का भुगतान करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। पार्टी का कहना है कि यह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) मतदाताओं को लुभाने के लिए किया गया एक प्रयास था, जो कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा को सीधे तौर पर खंडित करता है।
इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ शुक्रवार को इस याचिका पर विचार करेगी। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस रिट याचिका में मांग की गई है कि ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ना और आचार संहिता के दौरान उन्हें भुगतान करना अवैध घोषित किया जाए। याचिका के अनुसार, यह कृत्य संविधान की धारा 14, 21, 112, 202 और 324 का गंभीर उल्लंघन है।
याचिका में केवल आर्थिक हस्तांतरण ही नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का भी जिक्र है। पार्टी ने मांग की है कि चुनाव आयोग जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (जो भ्रष्ट आचरण से संबंधित है) के तहत कार्रवाई करे। याचिका में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि मतदान के दौरान ‘जीविका’ स्वयं सहायता समूह की लगभग 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को पोलिंग बूथों पर तैनात करना अवैध और अनुचित था। जन सुराज का आरोप है कि करीब 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को 10,000 रुपये का सीधा लाभ देकर जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश की गई है।
भ्रष्ट आचरण के इन कथित आरोपों के आधार पर याचिकाकर्ता ने बिहार में विधानसभा चुनाव रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की गुजारिश की है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह चुनाव आयोग को ‘एस सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु’ मामले के निर्देशों को लागू करने का आदेश दे। जन सुराज पार्टी ने सुझाव दिया है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से कम से कम 6 महीने पहले ही मुफ्त योजनाओं (Freebies) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसी योजनाओं पर रोक लगाने के लिए एक ‘न्यूनतम समय सीमा’ तय की जानी चाहिए, ताकि सत्ताधारी दल को चुनाव में अनुचित लाभ न मिल सके।
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