Bihar Rajya Sabha Row
Bihar Rajya Sabha Row: बिहार की सियासत में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं और विधान परिषद से उनके इस्तीफे के बीच, हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनावों के नतीजों ने विपक्षी खेमे में दरारें स्पष्ट कर दी हैं। चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग और विधायकों की रहस्यमयी अनुपस्थिति के कारण महागठबंधन को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस हार का सबसे बड़ा खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा है, जिसके तीन विधायक मतदान के समय गायब रहे। अब कांग्रेस आलाकमान ने अनुशासनहीनता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए इन बागी विधायकों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
बिहार प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने उन तीन विधायकों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है, जो राज्यसभा चुनाव की महत्वपूर्ण वोटिंग प्रक्रिया से नदारद रहे थे। खबरों के अनुसार, सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, मनोज विश्वास और मनोहर प्रसाद सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए पार्टी नेतृत्व को औपचारिक अनुशंसा भेज दी गई है। समिति ने इन तीनों विधायकों को पहले ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया था। विधायकों द्वारा दिए गए जवाबों की समीक्षा करने के बाद, समिति ने इसे असंतोषजनक पाया और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल तथा प्रदेश प्रभारी कृष्ण अल्लावरु को विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है। अब गेंद दिल्ली के पाले में है, जहाँ से इन पर अंतिम फैसले की मुहर लगेगी।
राज्यसभा चुनाव में इन तीन विधायकों की अनुपस्थिति महागठबंधन के लिए घातक साबित हुई। विपक्षी गठबंधन की ओर से मैदान में उतरे प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह को इस भीतरघात के कारण हार का सामना करना पड़ा। हार के बाद जब इन विधायकों से सवाल किए गए, तो उन्होंने अपनी गलती मानने के बजाय प्रदेश कांग्रेस की नीतियों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। बागी विधायकों का तर्क था कि पार्टी की वर्तमान कार्यप्रणाली और रणनीतियां सही नहीं हैं, जिसके कारण वे मतदान से दूर रहे। हालांकि, पार्टी इसे स्पष्ट रूप से धोखेबाजी और अनुशासनहीनता के रूप में देख रही है।
पिछले विधानसभा चुनाव में बिहार में कांग्रेस को केवल 6 सीटों पर जीत मिली थी। पार्टी के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इन 6 में से आधे यानी 3 विधायक अब पार्टी लाइन के खिलाफ खड़े हैं। बाल्मीकि नगर से विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, फारबिसगंज से मनोज विश्वास और मनिहारी से मनोहर प्रसाद सिंह ने अपने बागी तेवरों से कांग्रेस की जड़ें हिला दी हैं। इतनी कम संख्या होने के बावजूद विधायकों का इस तरह बगावत करना बिहार कांग्रेस के अस्तित्व पर संकट के बादल मँडरा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि कांग्रेस के इन बागियों को सत्ताधारी दल (जदयू और भाजपा) अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। इसके संकेत तब मिले जब सुरेंद्र कुशवाहा ने हाल ही में नीतीश सरकार के प्रभावशाली मंत्री अशोक चौधरी के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। वहीं, मनोहर प्रसाद सिंह को बिहार विधानसभा की एक महत्वपूर्ण समिति का अध्यक्ष बनाया जाना भी संदेह पैदा कर रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये विधायक जल्द ही पाला बदल सकते हैं।
बिहार में कांग्रेस के लिए यह समय आत्ममंथन का है। एक तरफ नीतीश कुमार की नई पारी की शुरुआत हो रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस अपने ही कुनबे को बिखरने से बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। यदि इन तीन विधायकों पर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो पार्टी के अन्य सदस्यों के बीच भी गलत संदेश जाएगा। बिहार की राजनीति में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही कांग्रेस के लिए यह ‘भीतरघात’ किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अब देखना यह है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी की टीम इन बागियों के साथ किस तरह का व्यवहार करती है।
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