Bihar Election 2026
Bihar Election 2026: बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित हुए 45 दिन बीत चुके हैं और राज्य में एनडीए (NDA) की सरकार भी पूरी मजबूती के साथ काम कर रही है। हालांकि, चुनावी हार के झटके से कांग्रेस पार्टी अब तक उबर नहीं पाई है। बिहार कांग्रेस ने अब इस मामले को कानूनी मोड़ देते हुए पटना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं और पूरी चुनाव प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा मतदान कराने की मांग की है।
कांग्रेस के तीन प्रमुख नेता—ऋषि मिश्रा, प्रवीण कुशवाहा और अमित टुन्ना—जो इस बार विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी थे, उन्होंने संयुक्त रूप से पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इन नेताओं का आरोप है कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए व्यापक स्तर पर धांधली की गई। कांग्रेस का दावा है कि ‘महिला रोजगार योजना’ के नाम पर प्रत्येक महिला को 10-10 हजार रुपये बांटे गए, जो सीधे तौर पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन और वोट खरीदने की कोशिश थी।
याचिकाकर्ताओं ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग ने बिहार में इस तरह धन बांटने की अनुमति कैसे दे दी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब तेलंगाना और राजस्थान के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी मोबाइल फोन बांटना चाहती थी, तब चुनाव आयोग ने उसे चुनावी रेवड़ी मानकर रोक लगा दी थी। कांग्रेस का सवाल है कि यदि मोबाइल बांटना गलत था, तो बिहार चुनाव के ऐन वक्त पर नकद राशि बांटने की अनुमति देना आयोग के दोहरे मापदंडों को दर्शाता है।
कांग्रेस के इन आरोपों और कानूनी कार्रवाई पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा प्रहार किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव हारने के बाद कांग्रेस अब हताशा में ऐसे कदम उठा रही है। भाजपा ने स्पष्ट किया कि ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ कोई नई योजना नहीं है, बल्कि यह काफी समय से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए चलाई जा रही है। भाजपा के अनुसार, कांग्रेस विकास कार्यों और महिला सशक्तिकरण की योजनाओं पर कीचड़ उछालने का काम कर रही है।
भाजपा के प्रवक्ता ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि जनता से उनकी कनेक्टिविटी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है, जिसे वे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस इसी तरह के भ्रम और मुगालते में रही तो वह भविष्य के चुनाव भी हारती रहेगी। भाजपा नेताओं ने विश्वास जताया कि कोर्ट में भी कांग्रेस की यह याचिका टिक नहीं पाएगी और उन्हें वहां भी हार का ही मुंह देखना पड़ेगा। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि कांग्रेस जितना कीचड़ उछालेगी, भाजपा का कमल उतना ही अधिक खिलेगा।
पटना हाई कोर्ट में दायर इस याचिका के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। अब सबकी नजरें कोर्ट के रुख पर टिकी हैं कि क्या वह इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग से जवाब तलब करेगा। यदि कोर्ट इस मामले की विस्तृत जांच के आदेश देता है, तो यह न केवल बिहार सरकार बल्कि चुनाव आयोग की साख के लिए भी एक बड़ी परीक्षा होगी। फिलहाल, बिहार में एनडीए का शासन चल रहा है, लेकिन कांग्रेस इस कानूनी लड़ाई के जरिए अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है।
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