Bihar Elections
Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल मचा दी है। राष्ट्रीय लोकजन शक्ति पार्टी (रालोजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने अपने भतीजे और वर्तमान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को उनकी पार्टी लोजपा (रामविलास) की शानदार जीत पर हार्दिक बधाई दी है। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर लिखे संदेश में उन्होंने कहा कि चिराग ने न सिर्फ पार्टी को मज़बूत किया है, बल्कि बिहार के लोगों का विश्वास जीतकर एक नया इतिहास भी रचा है।
इस चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 243 सदस्यीय विधानसभा में 202 सीटों पर कब्जा कर लिया। दूसरी ओर, महागठबंधन का प्रदर्शन अत्यंत निराशाजनक रहा और वह कुल मिलाकर सिर्फ 35 सीटें ही जीत पाया। यह परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।एनडीए का हिस्सा बनी लोजपा (रामविलास) ने इस बार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 29 सीटों पर चुनाव लड़ा और उनमें से 19 सीटें जीत लीं। यह परिणाम चिराग पासवान की नेतृत्व क्षमता और उनकी रणनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। युवा मतदाताओं और दलित समुदाय के बीच उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है।
पशुपति कुमार पारस ने अपने संदेश में लिखा कि चिराग पासवान ने राज्य में पार्टी की जड़ें मजबूत की हैं और एनडीए गठबंधन को स्थिरता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा 2025 में मिली इस सफलता से यह साबित हुआ है कि जनता ने विकास, स्थिरता और प्रगतिशील नेतृत्व का समर्थन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि चिराग का यह प्रदर्शन लोजपा (रामविलास) के भविष्य को नई दिशा देगा।एनडीए का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस चुनाव में सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए 89 सीटें जीतीं।एनडीए साझेदार जनता दल यूनाइटेड (जदयू) को 85 सीटें मिलीं।दोनों ही दलों की सफलता से गठबंधन की स्थिति बेहद मजबूत हो गई है और सरकार के गठन में किसी प्रकार की चुनौती नहीं दिख रही है।
चिराग पासवान के नेतृत्व में लोजपा (र) ने पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त राजनीतिक पुनरुत्थान किया है।2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने अपनी सभी 6 सीटों पर जीत हासिल कर 100 प्रतिशत सफलता दर्ज की थी।इसके विपरीत, 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 137 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन सिर्फ 1 सीट ही जीत पाई थी।हालाँकि, 2020 में लोजपा (रामविलास) ने जदयू के वोट बैंक पर गहरा असर डालते हुए उसके प्रदर्शन को काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि 2015 में जहाँ जदयू के पास 71 सीटें थीं, 2020 में यह घटकर 43 पर रह गई थीं।
इस चुनाव में कई अन्य दल भी मैदान में उतरे थे। जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) को 5 सीटें मिलीं।उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटें हासिल हुईं।इन दोनों दलों ने एनडीए के अंदर रहकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का इस बार का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। राजद को सिर्फ 25 सीटें मिलीं।कांग्रेस को 6 सीटों पर जीत हासिल हुई।माले (लिबरेशन) को 2 सीटें मिलीं।वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 5 सीटों पर जीत दर्ज की। माकपा, बीएसपी और इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी को 1-1 सीट मिली।
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