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Bihar Elections 2025: तेजस्वी यादव की महागठबंधन बैठक में नहीं आए मुकेश सहनी, बढ़ाई सियासी हलचल

Bihar Elections 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं और राजनीतिक दलों के बीच रणनीतिक बैठकों का दौर जारी है। इसी कड़ी में 30 जुलाई को महागठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक तेजस्वी यादव के घर बुलाई गई, जिसमें वीआईपी प्रमुख और निषाद पार्टी के नेता मुकेश सहनी शामिल नहीं हुए। सहनी ने अपनी ओर से प्रदेश अध्यक्ष को भेजा। इस कदम के बाद कयास लगाए जाने लगे हैं कि कहीं वे गठबंधन से नाराज तो नहीं हो गए हैं। खासकर तब जब वे 60 सीटों की मांग लेकर चर्चा में आए थे।

तेजस्वी यादव के लिए चुनौती बन रही है मुकेश सहनी की मांग

इंडिया गठबंधन के लिए हर पार्टी को संतुष्ट रखना अब आसान नहीं रहा। मुकेश सहनी द्वारा 60 सीटों की मांग ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। वीआईपी के प्रदेश अध्यक्ष ने बैठक में यह मांग गठबंधन की तरफ से रखी गई बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि मुकेश सहनी पारिवारिक कारणों से बैठक में नहीं आ सके। हालांकि, राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह बहस जारी है कि कहीं सहनी की गैरमौजूदगी गठबंधन में तनाव की शुरुआत तो नहीं।

60 सीटों की मांग को लेकर उठा विवाद

दो दिन पहले ही मुकेश सहनी तेजस्वी यादव के साथ एक कार्यक्रम में दिखाई दिए थे, जहां उन्होंने खुलकर कहा था कि वे 60 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। लेकिन महागठबंधन की बैठक के दिन वे दिल्ली में थे। इससे सियासी कयासों को हवा मिली कि शायद उन्हें पता चल गया हो कि उनकी मांग पूरी नहीं होने वाली। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या वे अकेले चुनाव लड़ेंगे या फिर एनडीए की ओर रुख करेंगे। इससे पहले वे बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं, लेकिन मनमानी रवैये की वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

एनडीए कर रहा है मुकेश सहनी को अपने पाले में लाने की कोशिश

बीजेपी ने भी सहनी के चार विधायक को अपने दल में शामिल कर सेंधमारी की है। दूसरी ओर एनडीए लगातार उन्हें अपने पाले में करने की कोशिश कर रहा है। हम के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मुकेश सहनी को खुले आम एनडीए में आने का ऑफर दिया है। मांझी ने कहा है कि निषाद समुदाय का विकास एनडीए के साथ ही संभव है। इस बीच तेजस्वी यादव इंडिया गठबंधन से 60 सीटों के अलावा डिप्टी सीएम का पद भी मांग रहे हैं, जो गठबंधन में टकराव का कारण बन रहा है।

राजनीतिक भविष्य की नई कयासबाजी

मुकेश सहनी की गैरहाजिरी और सीटों को लेकर बढ़ती मांगों ने बिहार चुनाव के समीकरणों को जटिल बना दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में वीआईपी नेता का रुख क्या रहता है और वे किस गठबंधन के साथ खड़े होते हैं। बिहार की राजनीति में इस मोड़ ने नए सियासी दांव-पेच की शुरुआत कर दी है, जो अगले चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं।

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