Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राजद (आरजेडी) को करारी हार का सामना कराया है, और अब पार्टी के नेता मदन शाह का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मदन शाह ने आरजेडी के टिकट कटने के बाद पार्टी को 25 सीटों पर सिमटने का श्राप दिया था। और यह श्राप बिल्कुल सही साबित हुआ, क्योंकि विधानसभा चुनाव में आरजेडी मात्र 25 सीटों तक ही सिमट गई। यह हार पार्टी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई है।
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Bihar Politics: मदन शाह ने पार्टी की हार पर क्या कहा?
चुनाव नतीजों के बाद मदन शाह का एक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने पार्टी की हार को लेकर गहरी निराशा जताई है। उन्होंने कहा, “पार्टी की इस हार से मेरा मन दुखी जरूर है, लेकिन मैं मानता हूं कि भगवान जो भी करता है, वह हमेशा अच्छे के लिए ही करता है।” मदन शाह ने यह भी कहा कि पार्टी की हालत सुधारने के लिए कुछ लोग जिम्मेदार हैं, जो इसे बर्बाद करने में लगे हुए हैं। उनका कहना था कि जब तक इन लोगों को पार्टी से बाहर नहीं निकाला जाएगा, पार्टी का भला नहीं हो सकता।
Bihar Politics: टिकट कटने के बाद का मदन शाह का बयान
पिछले महीने जब मदन शाह का टिकट कटने का मामला सामने आया था, तब उन्होंने पार्टी और खासकर तेजस्वी यादव पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने दावा किया था, “तेजस्वी बहुत घमंडी हैं, वे लोगों से मिलते नहीं हैं और सिर्फ टिकट बांट रहे हैं। संजय यादव और कुछ अन्य लोग पार्टी में माहौल खराब कर रहे हैं।” मदन शाह ने यह भी कहा था, “मैं यहां मरने आया हूं। लालू यादव मेरे गुरु हैं और उन्होंने मुझे टिकट देने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने बीजेपी के एजेंट संतोष कुशवाहा को टिकट दे दिया।” इस बयान के बाद पार्टी में मदन शाह की नाराजगी साफ तौर पर दिखाई दी थी।
लालू यादव से वादा और 2020 की घटना
मदन शाह ने 2020 में एक और घटना का जिक्र किया, जब लालू यादव ने उन्हें रांची बुलाया और तेली समुदाय की जनसंख्या का सर्वे करवाया। उन्होंने दावा किया कि लालू यादव और तेजस्वी यादव ने उन्हें मधुबन विधानसभा क्षेत्र से रणधीर सिंह को हराने का भरोसा दिया था। मदन शाह ने कहा, “तेजस्वी और लालू जी ने मुझसे कहा था कि वे मुझे टिकट देंगे, और मैं पार्टी के लिए 90 के दशक से काम कर रहा हूं। मैंने अपनी जमीन तक बेच दी थी, ताकि पार्टी के लिए काम कर सकूं।”
टिकट कटने पर मदन शाह की नाराजगी
मदन शाह ने टिकट कटने के बाद पार्टी में अपनी स्थिति और निर्णय पर कड़ा विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में कुछ लोग बुरी नीयत से काम कर रहे हैं और पार्टी को कमजोर कर रहे हैं। उनका कहना था कि जब तक इन लोगों को पार्टी से बाहर नहीं निकाला जाएगा, पार्टी की स्थिति में सुधार नहीं हो सकता। मदन शाह की नाराजगी ने पार्टी में चल रहे भीतरघात की ओर इशारा किया, जिससे पार्टी के अंदर की राजनीति भी सवालों के घेरे में आई।
क्या आरजेडी की स्थिति सुधरेगी?
मदन शाह के बयान और उनकी नाराजगी के बाद अब यह सवाल उठता है कि क्या आरजेडी अपने भीतर चल रहे राजनीतिक संकट को सुलझा पाएगी। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार और पार्टी के भीतर चल रही खींचतान ने लालू यादव और तेजस्वी यादव को भी चुनौती दी है। अगर आरजेडी को अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाना है, तो उसे अपने भीतर के मतभेदों को सुलझाना और नयी रणनीति तैयार करनी होगी।बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार और मदन शाह जैसे नेताओं का गुस्सा साफ दिखाता है कि आरजेडी में अब गहरे असंतोष की स्थिति है। पार्टी को अपनी नीतियों और नेतृत्व में बदलाव की जरूरत है, ताकि वह आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर सके।